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डॉ० दिनेश कुमार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाई

डॉ० दिनेश कुमार को होमी जहांगीर भाभा स्मृति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया
महेश गुप्ता
चंडीगढ़,18 नवंबर
: वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के कुलपति डॉ० दिनेश कुमार को भारतीय विज्ञान सम्मेलन समिति कोलकाता द्वारा वर्ष 2015 के होमी जहांगीर भाभा स्मृति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार 3 जनवरी, 2016 को मैसूर में होने वाले 103वें भारतीय विज्ञान सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदान किया जाएगा।
भारतीय विज्ञान सम्मेलन समिति के सदस्यता मामलों के महासचिव डॉ० नीलांशु बासु से प्राप्त जानकारी के अनुसार,उन भारतीय वैज्ञानिकों के कार्य ज्ञान की सराहना करती है जो विपरीत परिस्थितियों में साहस से काम करते हुए दीपक के समान प्रकाशित होते हैं तथा भावी पीढिय़ों के लिए दृष्टान्त बन जाते हैं। डॉ० दिनेश कुमार को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास, विशेष रूप से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग एवं सेमीकंडक्टर फिजिक्स के क्षेत्र में अनूठे योगदान के लिए दिया जा रहा है। इसके तहत एक स्वर्ण पदक दिया जाता है।
डॉ० दिनेश कुमार ने नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने अपने शैक्षणिक करियर की शुरूआत 1987 में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र से की। उन्हें शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे विदेशों में शोध, विशेषज्ञ व्याख्यान एवं विभिन्न सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, इंग्लैंड, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर चुके हैं। वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न वैज्ञानिक एवं अनुसंधान सोसाइटियों के सदस्य भी हैं।
डॉ० दिनेश कुमार ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड से स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधि हासिल की है। सन् 2003 में उन्हें पुन: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में शोधकार्य करने के लिए कॉमनवेल्थ छात्रवृत्ति प्रदान की गई। माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक, वीएलएसआई प्रौद्योगिकी, नये इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, नैनो विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ० दिनेश 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। वे कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नॉलोजी के निदेशक तथा एनपीमास परियोजना के संयोजक रहे चुके हैं। वे भारत सरकार की नैनो मिशन परियोजना, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयोजक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
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