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डॉक्टरों और मरीजों के बीच भरोसा फिर कायम हो: डॉ. गोयल

आईएमए हरियाणा ने दी डॉक्टर्स-डे पर भारत रत्न डॉ. बीसी रॉय को श्रद्धांजलि
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद,1 जुलाई:
टूटते भरोसे के इस दौर में डॉक्टरों और मरीजों को अपने संबंधों को एक बार फिर समझने की जरूरत है। यह कहना था आईएमए हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल का। डॉ. गोयल डॉक्टर्स-डे के अवसर पर आज यहां नीलम-बाटा रोड़ स्थित होटल आर्शीवाद में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। भारत रत्न डॉ बीसी रॉय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने डॉ. रॉय के जीवन पर प्रकाश डाला और बताया कि वह प्रतिष्ठित डॉक्टर एवं समाजसेवी थे।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत डॉक्टरी के पेशे को भी शामिल किए जाने के बाद से डॉक्टरों और मरीजों के ईमानदारी और भरोसे पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन अब यह दर्जा दरक रहा है। उन्होंने अपने सदस्यों का आह्वान किया कि वे डॉक्टर्स-डे पर इस बात के लिए प्रण लें कि वह मरीजों के संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए वचनबद्ध् हैं और अपना कार्य करते हुए नैतिकता के उच्च स्तरीय नियमों का पालन करेंगे। डॉक्टर ज्यादातर मरीजों के जीवन की सुरक्षा करता है। पर कुछ मामलों में हालात उनके नियंत्रण से बाहर होते हैं। ऐसे मामलों में मरीज के परिवार के प्रति डॉक्टरों को सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखना चाहिए। आईएमए ने डॉक्टरों और मेडिकल संस्थानों पर बढ़ते हिंसक हमलों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसा माहौल बनाया जाए कि जिससे डॉक्टर शांति और गरिमा से काम कर सकें। इससे मेडिकल क्षेत्र के लोग बिना किसी हमले और शोषण के डर के एक कदम आगे बढ़ कर बड़े स्तर पर समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर पाएंगे। इस मौके पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और मेडिकल संस्थानों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाए जाने की तुरंत आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
इस अवसर पर आईएमए हरियाणा के महासचिव डॉ. एसबी भट्टाचार्य एवं कोषाध्यक्ष डॉ. बी.के. शर्मा ने ‘राइट टू हेल्थ को मूलभूत अधिकार घोषित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मजबूत करने के साथ ही देश की 70 फीसदी आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं की मांग पूरा करने वाले छोटे नर्सिंग होम व क्लीनिकों को प्रोत्साहित करे और सहयोग दे।
आईएमए ने कहा कि संस्था भ्रूण लिंग जांच और भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक अपराधों की कड़े शब्दों में निंदा करती है और संस्था का कोई भी सदस्य अगर इस मामले में दोषी साबित हुआ तो उसे संस्था से निष्काषित कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्म श्री डॉ. मार्तंडे पिल्लई एवं राष्ट्रीय महासचिव पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल की ओर से जारी एक संदेश में कहा गया कि आम स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि प्रजनन के दौरान महिलाओं और नवजातों की मौतों की बड़ी संख्या और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में सरकार की अक्षमता पर भी चिंता जाहिर की गई। इस मामले में भारत, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी पीछे है। इलाज की लागत में हो रही लगातार बढ़ोतरी के मद्देनजर आईएमए ने सरकार से अपील की कि वह कोई ऐसी जमीनी स्वास्थ्य नीति लाएं जो देश के लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए हो। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए केंद्रीय बजट में कम से कम जीडीपी की ढाई फीसदी हिस्सेदारी हो। जो कि अभी एक फीसदी से भी कम है।
आइएमए ने सभी डॉक्टरों का आह्वान किया कि वह जनता के हित में की जाने वाली गतिविधियों को अपनाएं। जिसमें हफ्ते में कम से कम एक घंटा स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत को बढ़ावा दें। वरिष्ठ नागरिकों को मेडिकल छूट दें। लड़कियों से होने वाले भेदभाव को मिटाने के लिए कार्य करें। जटिल जन्मजात दिल के रोगों से पीडि़त बालिकाएं जो सर्जरी का खर्च नहीं उठा सकती हों, उन्हें नि:शुल्क सर्जरी सेवाएं प्रदान करें। देश के हित के हर अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश अरोड़ा, डॉ. आरएन रस्तोगी, डॉ. एके बख्शी, डॉ० बीडी पाठक, डॉ. एसपी जैन, डॉ. मनिंदर आहूजा, डॉ. निर्मेश वर्मा, डॉ. आरसी अरोड़ा, डॉ. अशोक पंजाबी, डॉ. राजीव सक्सेना आदि भी मौजूद थे।




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