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देखिए स्कूलों के लिए जिला प्रशासन ने क्या आदेश जारी किए?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 19 फरवरी:
जिला उपायुक्त जितेन्द्र यादव ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों में शिक्षा विभाग के अधिकारी और अध्यापक तथा कर्मचारी सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन की सभी हिदायतें पूरी करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशालय से आए दिशा-निर्देशों की जानकारी के अनुसार कक्षा पहली से नौंवी में पढऩे वाले बच्चों के माता-पिता की लिखित अनुमति से विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं संचालित करें। साथ ही यह भी आग्रह किया जाता है कि अपने क्षेत्राधिकार के विद्यालयों में इस सूचना का तुरन्त प्रभाव से क्रियान्वयन करते हुए। विद्यार्थियों के आने से पूर्वज एसओपी में दिए गए दिशा-निर्देशों की अनुपालना में समुचित व्यवस्था करना सुनिश्चित करें।
जिला शिक्षा अधिकारी ऋतु चौधरी ने बताया कि जिले के सरकारी तथा प्राईवेट विद्यालयों में कक्षा पहली से नौंवी में पढऩे वाले विद्यार्थियों के पठन-पाठन के लिए खोलने के निर्देश सरकार द्वारा जारी किए गए हैं। आदेशों के अनुसार यह अवगत करवाया जाता है कि गत् 10 फरवरी, 2022 से सभी सरकारी तथा प्राईवेट विद्यालयों को कक्षा पहली से नौंवी में पढऩे वाले विद्यार्थियों के पठन-पाठन के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है। अत: इसके लिए वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण के बचाव के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने की अनुपालना करते हुए जारी की गई एसओपी अनुसार कक्षाओं का संचालन किया जाए। यह भी अवगत करवाया जाता है कि विद्यालय का समय अध्यापकों के लिए प्रात: 9:00 बजे से बाद दोपहर 2:30 बजे तक तथा विद्यार्थियों के लिए प्रात: 9:00 बजे से बाद दोपहर 1:00 बजे तक रहेगा। विद्यार्थी अपने साथ घर से मध्याहन भोजन लेकर आयेंगे तथा एमडीएम के तहत दिया जाने वाला सूखा राशन पूर्व की भांति वितरित किया जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी ऋतु चौधरी ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए ऑनलाईन मुख्यमंत्री दूरवर्ती शिक्षा जारी रखते हुए विद्यालय खोले जा रहे हैं। ऐसे विद्यार्थी जो ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं उन्हें इसकी अनुमति रहेगी।
विद्यार्थी अपने माता-पिता की लिखित अनुमति मिलने पर ही विद्यालयों में पढऩे के लिए बुलाए जाएं। विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर कोई बाध्यता नहीं रहेगी तथा इस बारे विद्यार्थियों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था माता-पिता की सहमति पर ही निर्भर होगी।




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