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मल्होत्रा ने PHD चैंबर की मीटिंग में GST कर प्रक्रिया में सिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 1 अक्टूबर: डीएलएफ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान जे.पी. मल्होत्रा ने GST कर प्रक्रिया में ऐसा सिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया है जिसमें इनपुट के बड़े क्रेता ऐसे इनपुट पर जीएसटी को स्त्रोत पर डिडक्ट कर सकें जिसे वे MSME से खरीदते हैं। श्री मल्होत्रा ने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ MSME उद्योगों को यह मिलेगा कि GST देने के लिए वे उधार से बच सकेंगे। सुप्रसिद्ध औद्योगिक संगठन PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज के 103वें वार्षिक सेशन में MSME ऐस ग्रोथ एंड एंप्लॉयमेंट क्रिएटर पर आयोजित कार्यशाला में पैनलिस्ट के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी सिस्टम में एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत समय की मांग है। श्री मल्होत्रा के इन सुझावों का समर्थन पीएचडी चैम्बर के प्रधान अनिल खेतान सहित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने किया।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि बड़े उद्योगों को एमएसएमई सेक्टर जो प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं, उसके लिए उन्हें जीएसटी अदा करना पड़ता है जिससे उनकी आर्थिक समस्याएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि बड़े उद्योग स्त्रोत पर जीएसटी काट सके तो एमएसएमई सेक्टर को ऐसी उधारी से बचाया जा सकता है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि कई प्रोडक्ट पर जीएसटी की दरें 28 फीसदी तक हैं। ऐसे में एमएसएमई सेक्टर को ऊंची दरों पर लेना पड़ता है जो उनकी समस्याओं को बढ़ा देता है। डॉ०एच.पी. कुमार के प्रश्न के उत्तर में श्री मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि अधिकतर उत्पादों पर जीएसटी दरों को 28 फीसदी से कम किया गया है परंतु एमएसएमई सेक्टर की ऑपरेटिंग कॉस्ट काफी अधिक है।
उन्होंने कहा कि खरीदार या क्रेता द्वारा भुगतान लंबित करने पर एमएसएमई सेक्टर की कैपिटल ब्लॉक हो आती है और इसका प्रत्यक्ष नकारात्मक प्रभाव एमएसएमई सेक्टर पर पड़ता है, उनका विकास प्रभावित होता है और आर्थिक समस्या बढ़ जाती हैं।
एपीजे सत्या की सुश्री सुश्री सुषमा पॉल ने श्री मल्होत्रा द्वारा एमएसएमई सेक्टर के संबंध में विस्तृत अध्ययन के लिए उनकी सराहना की।
श्री मल्होत्रा ने केंद्र सरकार की मुद्रा ऋण संबंधी योजना पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना को MSME सेक्टर के विकास के लिए तैयार किया गया था। अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि 10 लाख रूपए की ऋण राशि से मौजूदा परिस्थिति में रोजगार का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करना आसान नहीं। उन्होंने कहा कि संभवत: यही कारण है कि निर्माण क्षेत्र में नौकरियों को प्रोक्सी के रूप में शामिल किया जाता है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि मुद्रा लोन की राशि बढ़ाई जानी चाहिए और इसका विस्तार एमएसएमई सेक्टर तक अधिकता से किया जाना चाहिए।
पैनल में एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार के डीसी राममनोहर मिश्रा, सुषमा पॉल, संजय भाटिया, अंजू बजाज, सुरेश कुमार शामिल थे।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि जनसंख्या में कमी से युवा वर्ग की संख्या भी कमी हो रही है जिससे श्रम शक्ति का कम होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जो लोग कृषि क्षेत्र को छोड़ रहे हैं उनके लिए रोजगार का भी प्रबंध किया जाना जरूरी है, जिसके लिए दक्षता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
श्री मल्होत्रा ने एक जिला एक उत्पाद को एक बेहतर विकल्प करार देते हुए कहा कि इससे युवा वर्ग को कृषि या अपने गांव को छोडऩे की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि एक जिला एक उत्पाद को उत्तर प्रदेश सरकार ने माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नई उड़ान नई पहचान की टैगलाइन के साथ आरंभ किया है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिल सके। इस अवसर पर पीएचडी चैंबर के उप-प्रधान डी.के. अग्रवाल ने श्री मल्होत्रा को स्मृति चिन्ह प्रदान किया




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