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डीएचबीवीएन के 38 अधिकारियों के विरूद्ध पिलर बॉक्स घोटाले में चार्जशीट जारी

आरटीआई कार्यकर्ता वरूण श्योकंद ने की थी करोड़ों रूपये के इस पिलर बॉक्स घोटाले की शिकायत
नवीन गुप्ता
चण्डीगढ़/हिसार, 30 दिसम्बर:
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने मीटर पिलर बॉक्स योजना की स्थापना में अनियमितताएं करने पर अपने 38 अधिकारियों के विरूद्ध आरोप-पत्र जारी किए हैं। इनमें दो चीफ इंजीनियर, चार अधीक्षक अभियंता, सात कार्यकारी अभियंता, छ: एसडीओ, दो वित्त सलाहकार, एक वरिष्ठ लेखा अधिकारी, एक लेखा अधिकारी, सात कनिष्ठ अभियंता, सात मंडल लेखाकार तथा एक सैक्शन अधिकारी शामिल है। ये सभी अधिकारी उस समय भिवानी, हिसार, सिरसा, रेवाड़ी तथा नारनौल सर्कल में तैनात थे। इस मामले की शिकायत गत् 12 नवम्बर, 2014 को करीब एक वर्ष पूर्व आरटीआई कार्यकर्ता फरीदाबाद निवासी वरूण श्योकंद ने डीएचबीवीएन के एमडी अरूण वर्मा सहित मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा प्रधानमंत्री को की थी।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबन्ध निदेशक अरूण कुमार वर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि डीएचबीवीएन द्वारा अप्रैल-2013 में मीटर पिलर बॉक्स योजना की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं के मीटरों को उनके परिसरों से बाहर मीटर पिलर बॉक्स में स्थापित करना था ताकि बिजली की चोरी रोकने के साथ-साथ वितरण ट्रांसफॉर्मर पर लोड संतुलन बना रहे। इसके लिए निगम प्रबन्धन ने शुरू में 15 फर्मो को सूचीबद्ध किया था जो बाद में बढ़ाकर 21 फर्मो को सूचीबद्ध कर दिया। निगम ने स्कीम के तहत सभी मदों का अधिकतम यूनिट रेट भी स्वीकृत किया था।
उन्होंने बताया कि फरीदाबाद सर्कल में भी इसी मामले की जांच की त्रुटियों के आधार पर पता लगा कि अन्य सर्कलों में भी ऐसी कुछ त्रुटियां व अनियमितताएं पाई जा सकती हैं। इसी आधार पर अगस्त-2014 में प्रधान सचिव, बिजली विभाग, हरियाणा की स्वीकृति तथा हरियाणा बिजली निगमों के निदेशक सतर्कता की अनुशंसा पर डीएचबीवीएन के मुख्य अभियंता दलीप सिंह तथा अधीक्षक अभियंता आर.के.सोढा के अधीन एक दस सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की प्रारंभिक जांच में इन अधिकारियों को कुछ मामलों में दोषी पाया गया।
इस प्रकार इन सभी अधिकारियों को कत्तव्यों में लापरवाही, ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने तथा निगम को घाटा पहुंचाने के कारणों का उत्तरदायी मानते हुए आरोप-पत्र जारी किए गए हैं।
प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि इन अधिकारियों को आरोप-पत्र जारी करने से पहले बोर्ड ऑफ. डायरेक्टर्स तथा कानूनी अनुशंसा ली गई है तथा इस मामले की स्टेट विजिलैंस द्वारा अलग से जांच की जा रही है।




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