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वर्तमान समय उद्योग जगत के लिये अपनी छवि को और अधिक बेहतर बनाने का है: डा० अमिया चंद्रा

उद्योग जगत को सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए: रवि वासुदेवा
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद,16 अक्तूबर
: वर्तमान परिवेश में जबकि उद्योगों के समक्ष चुनौतियां बढ़ रही हैं ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि उद्योग सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं और निर्यात में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित करें ताकि आने वाले समय में उद्योग जगत के समक्ष नई संभावनाएं बन सकें। यह उद्गार व्यक्त करते हुए जनरल फौरन ट्रेड के ज्वाईंट डायरेक्टर डा० अमिया चंद्रा ने कहा कि वर्तमान समय एमएसएमई सैक्टर और उद्योग जगत के लिये अपनी छवि को और अधिक बेहतर बनाने का है और अंतर्राष्ट्रीय जगत में उद्योगों को अपनी गुणवत्ता, उत्पादन की कीमतों तथा अंतर्राष्ट्रीय मांग के अनुरूप तैयार करने का है। डा० चंद्रा यहां इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, चैम्बर ऑफ इंडियन ओवरसीज आंत्रेप्यूनर्स, हरियाणा चैम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज और डीजीएफटी द्वारा आयोजित एक्सपोर्ट एवेयरनैस प्रोग्राम में उद्योग प्रबंधकों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन निर्यात बंधु योजना के तहत किया गया था।
डा० चंद्रा ने निर्यात बंधु योजना पर विचार व्यक्त करते कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना और नई विदेश व्यापार नीति (2015-2020) के अनुरूप निर्यातकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा के दौर में निर्यात हेतु तैयार करना है। डा० चंद्रा ने कहा कि फरीदाबाद काफी पुराना व प्रतिष्ठित औद्योगिक शहर है और 20,000 एमएसएमई तथा बड़े क्षेत्र के उद्योग यहां कार्यरत हैं और 50 प्रतिशत तक निर्यातक ईकाईयां हैं। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में कार्यरत उद्योग अपनी गुणवत्ता के लिये विशेष रूप से तत्पर रहे हैं, ऐसे में निर्यात के क्षेत्र में ये उद्योग काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जिसके लिये प्रशिक्षण और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाया जाना चाहिए।
निर्यात के लिये सरकार द्वारा जारी विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए डा० चंद्रा ने कहा कि सरकार विभिन्न देशों में निर्यात के लिये प्रोत्साहन देती है और कई ऐसी योजनाएं बनाई जा रही हैं जिससे उद्योगों को लाभ मिले। उन्होंनेे अफ्रीका, लेटिन और अमरीकी देशों में निर्यात से संबंधित विभिन्न तथ्यों की जानकारी दी और निर्यातकों से आह्वान किया कि वे वैकल्पिक बाजार जिसमें पोलैंड शामिल है, पर ध्यान दें। एमएसएमई सैक्टर के समक्ष आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए डा० चंद्रा ने कहा कि बढ़ती लागत, लाजिस्टिक संबंधी चुनौतियां और अंतर्राष्ट्रीय पहलुओं पर इस क्षेत्र को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने रिसर्च एंड डवलैपमैंट हेतु निवेश किये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे निश्चय ही लाभ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आज रिसर्च में कॉमन डवलैपमेंट सैंटर की सहकारिता के आधार पर आवश्यकता है, क्योंकि यह एक अकेले के बस का नहीं है। आज क्वान्टिटी की नहीं क्वालिटी की आवश्यकता है। जीरो डिफैक्ट आईटी का प्रयोग डाक्यूमैंट मैनेजमेंट सर्विस प्रोफैशनल की नियुक्ति समय की मांग बन गये हैं।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के रीजनल डायरैक्टर डा० राकेश सूरज ने कहा कि किस प्रकार काउंसिल उद्योगों को निर्यात के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं देने के लिये तत्पर है। उन्होंने उद्योगों को निर्यात बंधु स्कीम के तहत विशेष प्रशिक्षण देने की घोषणा करते कहा कि उत्तरी भारत में ऐसे 20 आयोजन किये जा रहे हैं जिनका लाभ उद्योग जगत विशेषकर एमएसएमई सैक्टर द्वारा उठाया जा सकता है। काउंसिल द्वारा समय-समय पर आयोजित सेमिनार, एग्जीबिशन तथा अन्य कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए श्री सूरज ने कहा कि निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के लिये काउंसिल कार्यरत है जिसका लाभ उद्योग प्रबंधकों को उठाना चाहिए।
सुश्री रूचिका गुप्ता ने निर्यातकों को प्रोत्साहन देने वाली विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते इंडिया इंजीनियरिंग सोर्सिंग शो कन्सेप्ट के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि 24 से 26 नवम्बर 2015 में मुंबई में इस शो का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 500 से अधिक विदेशी बॉयर भारतीय निर्यातकों से फेस टू फेस मिलेंगे। उन्होंनेे कहा कि यह शो व्यापार के अवसरों को बढ़ाने वाला तथा एमएसएमई सैक्टर के लिये विशेष रूप से महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।उन्होंने जानकारी दी कि इंजीनियरिंग क्षेत्र में 60 मिलियन लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कुल जीडीपी का 8 प्रतिशत योगदान है। देश के कुल निर्यात में यह क्षेत्र 22 प्रतिशत का योगदान देता है। देश के कुल निवेश में इसका 29.9 प्रतिशत भाग है जबकि फोरन कलैबोरेशन में यह 62.8 प्रतिशत सहभागिता निभा रहा है। इतना ही नहीं वर्ष 2014-2015 में इस क्षेत्र ने 77.55 बिलियन यूएस डालर का निर्यात किया है।
दिल्ली प्रोडक्टिविटी काउंसिल के चेयरमैन व एनएसआईसी के पूर्व चेयरमैन डा० एच.पी. कुमार ने एमएसएमई सैक्टर के लिये और अधिक उदारवादी योजनाएं क्रियान्वित करने की सिफारिश करते कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि उत्पादन की लागत न्यूनतम स्तर पर लाई जाए। उन्होंने कहा कि निर्यात क्षेत्र में 20 हजार इंजीनियरिंग यूनिट अपनी प्रभावी स्थिति का प्रदर्शन कर सकते हैं जिसके लिये और अधिक सकारात्मक नीति जरूरी है। डा. कुमार ने कहा कि आज देश में 5.7 करोड़ लघु एवं मध्यम उद्योग कार्यरत हैं। जो राहत प्रदान की जाती है वह समुद्र में एक बूंद के समान कही जा सकती है। 25 करोड़ व्यक्ति इस क्षेत्र पर आश्रित हैं और देश की अर्थव्यवस्था का यह क्षेत्र आधार कहा जा सकता है, चीन ने इसी क्षेत्र को आगे बढ़ाकर इतनी शक्ति प्राप्त की है।
श्री कुमार ने एसएमई क्षेत्र के विकास हेतु इज-ऑफ डुईंग बिजनेस, निर्यात हेतु विदेशी लिंक, निर्यात आर्डर उपरांत डीजीएफटी व बैंक सहायता उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निर्यातक देश की सेवा करते हैं, अत: उन्हें आर्डर या धन की चिंता से युक्त कर केवल गुणवत्ता व कम लागत के विषय में ही सोचने देना होगा। सुविधाओं एवं राहतों की इस क्षेत्र की पूरी-पूरी जानकारी अपडेट देने का प्रबंध किया जाना चाहिए।
सिडबी के मुख्य महाप्रबंधक महेश धर्मा ने सरकार द्वारा एमएसएमई सैक्टर के लिये बनाई गई विभिन्न योजनाओं का स्वागत करते कहा कि इनका यथासंभव लाभ उठाया जाना चाहिए। श्री धर्मा ने बैंकों द्वारा उच्च ब्याज दर, डीआईसी की कार्यप्रणाली का अधिक लाभ उद्योगों तक न पहुंचने, टैक्स संबंधी मुद्दों पर केंद्र व राज्य सरकारों के बीच सामंजस्य के अभाव, आईटी क्षेत्र में और अधिक सुधार की आवश्यकता, श्रम अशांति, बाधित बिजली व्यवस्था इत्यादि पर उद्योगहित में निर्णय लेने व योजना बनाने का आग्रह भी किया।
एक्सपोर्ट क्रेडिट कारपोरेट के अमित कुमार ने निर्यातकों के लिये विदेशों में माल भेजने उपरांत धन वसूली रिस्क के संबंध में विस्तृत जानकारी देते बताया कि कारपोरेट के सहयोग व संरक्षण में निर्यातक सुरक्षित रहता है।
ओरिएन्टल बैंक आफ कामर्स के महाप्रबंधक एन.के. चौहान ने इस अवसर पर कहा कि तीन वर्ष उपरांत देश की 25 प्रतिशत जनता 25 वर्ष की युवा होगी जिन्हें केवल एसएमई क्षेत्र ही रोजगार उपलब्ध करा सकता है। एसएमई का संचालन एक ही व्यक्ति करता है। बैंक सहायता के लिये इससे कभी पेपर, कभी बैलेंसशीट व कभी भिन्न-भिन्न स्टेटमैंट मांगी जाती है जो कठिन होती है। इतना ही नहीं ई-कामर्स एक नई चुनौती आ गई है जिसके लिये इस क्षेत्र को फंड चाहिए। श्री चौहान ने बताया कि इन परेशानियों को देखते हुये ओबीसी ने बैलेंसशीट के आधार पर आर्थिक सुविधा, समय पर आवश्यकतानुसार आर्थिक सुविधा एवं उदार नीतियों के बल पर एसएमएस को अधिकाधिक सुविधाएं एवं राहत देने की नीति बनाई है।
चंैबर ऑफ इंडियन ओवरसीज आंत्रेप्यूनर्स के चेयरमैन रवि वासुदेव ने ई-गर्वनैंस डिजीटलाईजेशन के माध्यम से उद्योगों को और अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करते कहा कि इस संबंध में उद्योग जगत को सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। श्री वासुदेव ने दीर्घकालिक लीज योजना पर फैक्टरी शैड मुहैया कराने, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिये सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिये भी प्रभावी नीति की मांग की। उन्होंनेकहा कि लघु व मध्यम उद्योग प्रबंधक को अचानक कैपीटल मद में खर्च करना पड़ता है जिससे उसका कैश फ्लो प्रभावित होता है, इसके लिये अलग से व्यवस्था की आवश्यकता है।
ईपीसी के डिप्टी रीजनल चेयरमैन प्रदीप के. अग्रवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जबकि कार्यक्रम में सर्वश्री एमएल शर्मा, सतीश भाटिया, संजय गुलाटी, चरणजीत सचदेवा, श्री नांगिया, जीएस त्यागी, आरएस वधावन, संजय वधावन, बीपी सिंह, योगी नागपाल सहित बड़ी संख्या में उद्योग प्रबंधकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।




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