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निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को रियायती शिक्षा को लेकर भाजपा विधायक संतोष यादव ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया

सरकार की नकारात्मक कार्यवाही से गुस्साए अभिभावक 24 मार्च को प्रशासक हुडा व उपायुक्त फरीदाबाद कार्यालय के सामने करेंगे जबरदस्त आक्रोश प्रदर्शन
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद, 20 मार्च: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) से आवंटित भूमि पर चल रहे निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को रियायती शिक्षा को लेकर अटेली की भाजपा विधायक संतोष यादव ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान रियायती शिक्षा को लेकर अपनी ही सरकार से सवाल कर दिया है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच द्वारा दिसम्बर-जनवरी में सभी विधायकों को भेजे गए मांगपत्र के फलस्वरूप विधायक संतोष यादव ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया है। मंच ने फरीदाबाद के सभी विधायकों को भी इस तरह का एक मांगपत्र सौंपा था लेकिन किसी भी विधायक ने यह मुद्दा विधानसभा में नहीं उठाया है। इस पर मंच ने रोष प्रकट करते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अभिभावकों से कहा है कि वे अपने विधायक से मिलकर इस पर अपनी नाराजगी प्रकट करें। संतोष यादव द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि हुडा की नीति के तहत स्कूलों और शैक्षणिक संस्थाओं को हुडा नियमों के तहत 10 प्रतिशत दाखिला गरीब व पिछड़े छात्रों को और 10 प्रतिशत दाखिला अन्य वर्गों के मेधावी छात्रों को देकर उनसे सरकारी स्कूलों की भांति फीस वसूलने व अपनी मैनेजमेंट कमेटी में हुडा का एक प्रतिनिधि शामिल करने का नियम है। इस नियम का निजी स्कूलों ने कितना पालन किया इसके बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है।
मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद ही संपदा अधिकारी हुडा फरीदाबाद ने एक बार पुन: फरीदाबाद के निजी स्कूलों को नोटिस भेजे हैं। मंच इसे सिर्फ एक कागजी कार्यवाही मानता है। मंच का कहना है कि इस प्रकार के नोटिस प्रत्येक शिक्षा सत्र में फरवरी-मार्च में ही स्कूलों को भेजे जाते हैं और उन्हें एक महीने का समय जवाब देने के लिए दिया जाता है। इस एक महीने यानी अप्रैल माह में स्कूल प्रबंधक अपने यहां दाखिला प्रक्रिया पूरी करके छात्रों से बढ़ी हुई फीस वसूल लेते हैं और उन्हें किताब कॉपी के सैट खरीदने को मजबूर करते हैं। इस प्रकार वे हुडा के नोटिसों के बाद की आगे की कार्यवाही से बच जाते हैं। यह नोटिस-नोटिस का खेल पिछले 10 सालों से चल रहा है। मंच ने पिछले दस सालों में हुडा द्वारा इन स्कूलों को भेजे गए नोटिसों की प्रति हासिल की है। जिसे वे मुख्यमंत्री व मुख्य प्रशासक हुडा पंचकुला को भेजकर हुडा विभाग के इस नोटिस-नोटिस के खेल की जानकारी दे रहे हैं।
हुडा कि इस नकारात्मक कार्यवाही से गुस्साए अभिभावक 24 मार्च को प्रशासक हुडा व उपायुक्त फरीदाबाद कार्यालय के सामने जबरदस्त आक्रोश प्रदर्शन करेंगे। जिसमें एमवीएन, एपीजे, एमवीएन अरावली हिल्स, विद्या मंदिर, डीपीएस, मानव रचना, टेगौर, डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद, मॉडर्न, सैन्ट जॉन, सैन्ट थॉमस, सैन्ट जोसफ, रेयान, डीएवी आदि स्कूलों की पेरेन्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी व संघर्ष कमेटी के सदस्य मनोज शर्मा, महेश अग्रवाल, बीआर सिंगला, वीरेन्द्र दत्त, उमाशंकर, तेजेन्द्र सिंह एडवोकेट, ओपी तंवर, वेदप्रकाश, नरेश कुमार, भगत सिंह, मंगतराम सिंगला, अनुज शर्मा, शिव प्रसाद, महेश आलूवालिया सहित सैंकड़ों अभिभावक व नागरिक भाग लेंगे।
मंच ने मुख्यमंत्री को यह भी जानकारी दी है कि 9 मई 2014 को मंच का एक प्रतिनिधिमंडल उस समय की हुडा प्रशासक सुप्रभा दहिया से मिला था और ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि हुडा नियमों के उल्लंघन पर दोषी स्कूलों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाए। उन्होंने मंच को आश्वासन दिया था कि एक महीने के अंदर मंच के मांगपत्र पर उचित कार्यवाही की जाएगी। कार्यवाही न होने पर कई बार मंच ने हुडा प्रशासक को पत्र लिखा। मंच ने 21 जनवरी 2015 को हुडा प्रशासक पीसी मीणा से मिलकर मंच के पत्रों पर कोई भी कार्यवाही न होने से संबंधित एक मांगपत्र सौंपा था। उस समय पीसी मीणा ने मंच को आश्वासन दिया था कि मंच के ज्ञापन पर एक महीने के अंदर नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले कार्यवाही कराएंगे। लेकिन उन्होंने भी सिर्फ कोरा आश्वासन मंच को दिया। एक अप्रैल, 2015 से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। स्कूल प्रबंधकों ने हुडा के एक भी नियम का पालन नहीं किया है और न तो अपनी दाखिला पॉलिसी और न ही अपनी फीस संरचना की जानकारी हुडा विभाग को भेजी है।
मंच ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया है कि निजी स्कूलों में हुडा द्वारा मंजूर किए गए बिल्ंिडग प्लान से हटकर काफी अवैध निर्माण हुआ है जिसकी जानकारी मंच ने हुडा प्रशासक को दी है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि एक आम शहरी द्वारा हुडा के बिल्ंिडग प्लान से हटकर अगर थोड़ा सा भी अवैध निर्माण होता है तो हुडा विभाग उसे तोडऩे व उस पर भारी जुर्माना लगाने की कार्यवाही पर जरा भी देर नहीं लगता है। जबकि इन स्कूलों में अवैध निर्माण सरेआम दिखाई दे रहा है। लेकिन आज तक हुडा विभाग ने इन निजी स्कूलों के अवैध निर्माण को हटाने की कोई भी कार्यवाही नहीं की है।
मंच के मांगपत्र पर हुडा प्रशासक ने मार्च 2006 व फरवरी 2015 में उपायुक्त फरीदाबाद को पत्र लिखकर मुख्य प्रशासक पंचकुला केपरिपत्र नं. ए-2000/1605-46 दिनांक 24-01-2000 के अनुसार उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन उपायुक्त फरीदाबाद ने आज तक कोई भी कमेटी का गठन नहीं किया है। इस कमेटी द्वारा ही इस नियम का पालन करना होता है। कमेटी समाज के इस वर्ग के छात्रों से आवेदन मांगेगी और स्कूलों से उनके यहां प्रत्येक कक्षा में होने वाले दाखिलों की सूची मांगेगी और कमेटी द्वारा स्वीकृत किए गए बच्चों के नाम इन स्कूलों में भेजकर दाखिला किया जाना होता है। लेकिन पिछले 14 साल से उपायुक्त कमेटी का गठन ही नहीं हुआ है तो दाखिला होना तो दूर की बात है।
मंच ने मुख्यमंत्री व मुख्य प्रशासक हुडा को यह जानकारी भी दी है कि हुडा के नियमों का उल्लंघन सही पाए जाने पर संपदा अधिकारी हुडा फरीदाबाद में 2001 में शहर के 18 निजी स्कूलों का भूमि आवंटन रद्द कर दिया था। निजी स्कूलों की सशक्त लॉबी व राजनैतिक दबाव के चलते उस समय के प्रशासक हुडा ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए संपदा अधिकारी के आदेशों को रद्द करते हुए भूमि आवंटन बहाल कर दिया था। उस समय स्कूल प्रबंधकों ने शपथ पत्र के रूप में एक ऐफिडेविट दिया था कि वे आगे से हुडा के सभी नियम-कानूनों का पालन करेंगे और किसी भी तरह से शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं करेंगे। मंच ने हुडा प्रशासक को बताया कि इन स्कूल प्रबंधकों ने झूठा ऐफिडेविट दिया था। इन सभी स्कूल प्रबंधकों एस्टेट ऑफिसर ने 2002 से लेकर 2013 तक दर्जनों 17(1) से 17(4) तक के नोटिस जारी किए हैं लेकिन ठोस कार्यवाही किसी भी स्कूल प्रबंधक के खिलाफ नहीं की गई है। सभी स्कूलों में हुडा विभाग द्वारा मंजूर किए गए बिल्ंिडग प्लान से ज्यादा अवैध निर्माण अपने स्कूलों में कर रखा है।
मंच ने हुडा नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल की दाखिला पॉलिसी व फीस संरचना शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले हुडा को देनी होगी। अपने स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में हुडा का एक अधिकारी शामिल होगा, जिस क्षेत्र में स्कूल खुला है उस क्षेत्र के बच्चों को पहले दाखिला देना होगा। गरीब, पिछड़े व मेधावी छात्रों को 20 प्रतिशत दाखिला देकर उनसे सरकारी स्कूलों की भांति फीस लेनी होगी। जिस कक्षा तक स्कूल चलाने की अनुमति मिली है उतनी कक्षा तक ही स्कूल चलाना होगा। अपने स्कूल के अन्दर किसी भी प्रकार की दुकान/कोचिंग सेन्टर, स्विमिंग पूल, स्टेडियम, रिहायशी मकान/फ्लैट आदि अन्य किसी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां नहीं चलाई जाएंगी, जिस शिक्षण सोसायटी को हुडा ने जमीन दी है और जिस पर छात्र व अभिभावकों के पैसे से बिल्ंिडग बनाई गई है उसे मूलधारक किसी भी हालत में न तो ट्रांसफर कर सकता है और न ही बेच सकता है। फरीदाबाद में दर्जनों स्कूलों के प्रबंधकों ने अरबों रुपए कमाकर अपने स्कूलों को बेच दिया है।




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