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मनीष ग्रोवर के इशारे पर अधिकारियों ने किया चीनी मिलों में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी: कुंडू

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
चंडीगढ़, 12 फरवरी
: महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने प्रदेश के पूर्व सहकारिता राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर द्वारा विभिन्न चीनी मिलों में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और अनियमितताओं के संबंध में गहन जांच हेतु SIT के गठन की मांग की है। यहां होटल माऊंट व्यू में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक ने यह बड़ा खुलासा किया। इस धोखाधड़ी को लेकर उन्होंने एक ज्ञापन हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंपा है।
ज्ञापन में बलराज कुंडू ने कहा है कि हरियाणा स्टेट फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शूगर मिल्स लिमिटेड द्वारा पिछले 4 वर्षों में 3300 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया है जबकि वास्तव में यह पूर्व राज्य मंत्री, मनीष ग्रोवर के इशारे पर संबंधित अधिकारियों द्वारा धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का मामला है। इसका खामियाजा प्रदेश के गन्ना किसानों को उठाना पड़ रहा है।
विधायक कुंडू के अनुसार शूगर फेड के अंतर्गत चीनी मिलों में चीनी की रिकवरी को 8-9 प्रतिशत के रूप में दिखाया गया है। निजी क्षेत्र की मिलों में यह रिकवरी 12-13 प्रतिशत रही है। स्पष्ट रूप से यह शूगर फेड की चीनी मिलों में चोरी, धोखाधड़ी और अक्षमता को दर्शाता है।
उनका कहना था कि यह पता चला है कि तत्कालीन राज्य मंत्री के करीबी रिश्तेदारों भावुक ग्रोवर और सौम्या ग्रोवर के स्वामित्व वाली फर्मों के माध्यम से देशी शराब भरने हेतु पैट बोतलें और रॉप सील खरीदे गये। यह सामग्री घटिया थी और नियमों का उल्लंघन करते हुए तय मूल्य से बहुत ज्यादा कीमत पर खरीदी गयी, जिससे डिस्टलरी और चीनी मिलों को भारी नुकसान हुआ।
कुंडू ने कहा, ‘ये सभी गड़बडिय़ां पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के इशारे पर रमेश सरोहा डिस्टलरी मैनेजर और वीर सिंह कालीरमन, एमडी शुगर मिल द्वारा की गयीं।
आश्चर्य की बात है कि वर्ष 2016-17 के दौरान 80,000 क्विंटल शीरा का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। शीरे को चीनी मिल से पानीपत डिस्टिलरी तक पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता है और इस छिपाये गये शीरे से अवैध शराब तैयार करके उसे ब्लैक मार्केट में बेचा गया।’
उन्होंने खुलासा किया कि तत्कालीन शूगरफेड चेयरमैन ने इस बारे में जांच शुरू की थी, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। राजनीतिक दबाव के कारण जांच अभी भी लंबित है। एमडी, वीर सिंह कालीरमण द्वारा 7 करोड़ रुपये की लागत से एक बाष्पीकरण संयंत्र स्थापित किया गया, जिसकी वास्तविक कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये है। यह संयंत्र कभी चल ही नहीं पाया, लेकिन इसके रख-रखाव पर हर साल भारी रकम खर्च हो रही है। ज्ञापन में विभिन्न चीनी मिलों की अन्य कई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।
कुंडू ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अशोक खेमका, वजीर सिंह गोयल या वीएस कुंडू जैसे किसी ईमानदार IAS अधिकारी की निगरानी में SIT गठित करके जांच करायी जाये। यह मामला वह गृहमंत्री अनिल विज के संज्ञान में भी लाएंगे, ताकि चीनी मिलों के नुकसान के लिए जिम्मेदार तथ्यों को सामने लाया जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।




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