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रोटरी क्लब मिड टाऊन ने धूमधाम से मनाया लोहड़ी पर्व

रोटरी क्लबों का मुख्य ध्येय समाजसेवा में पूरी तरह से लिप्त रहना है: सुधीर मंगला
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद, 14 जनवरी: सुंदर मुंदरिए-हो तेरा कौन विचारा-हो, दुल्ला भट्टी वाला-हो, दुल्ले ने धी ब्याही-हो। लोहड़ी के इस गीत के साथ शहर के रोटेरियंस ने ढोल की थाप पर जमकर आनंद लिए। मौका था रोटरी क्लब ऑफ फरीदाबाद मिड टाऊन द्वारा आयोजित लोहड़ी पर्व का। टिम्पी फार्म हाऊस में आयोजित इस समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डीजी सुधीर मंगला, रोटेरियन श्रीमती सुनीता मंगला, विनय भाटिया, नवदीप चावला, डिस्ट्रिक डायरेक्टर एडमिनिस्टे्रशन विवेक जैन, असिस्टेंट गर्वनर सुरेश चंद्र, बी.आर.भाटिया, डिस्ट्रिक डायरेक्टर एडमिनिस्टे्रशन विजय जिंदल, अमित जुनेजा, अमरजीत लाम्बा, राजेश मेंदीरत्ता आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। क्लब के अध्यक्ष जितेन्द्र ङ्क्षसह छाबड़ा ने आये हुए सभी अतिथियो का बुके देकर स्वागत किया।
इस अवसर पर डी.जी सुधीर मंगला ने कहा कि रोटरी क्लबों का मुख्य ध्येय समाजसेवा में पूरी तरह से लिप्त रहना और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करना है।
समारोह को सम्बेाधित करते हुए डिस्ट्रिक डायरेक्टर एडमिनिस्टे्रशन विवेक जैन, असिसटेंट गर्वनर बी.आर.भाटिया, एजी सुरेश चंद्र, डिस्ट्रिक डायरेक्टर एडमिनिस्टे्रशन विजय जिंदल ने कहा कि हम सभी को समाजसेवा में अधिक से अधिक भाग लेना चाहिए ताकि हमारी उन लोगों तक सहायता पहुंच सके जो कि इस सहायता के हकदार है।
इस अवसर पर क्लब के प्रधान जितेन्द्र ङ्क्षसह छाबड़ा ने कहा कि क्लब जल्द ही गल्र्स स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा, सीनियर सिटीजनों के लिए दो इलैक्ट्रोनिक रिक्शा चलाने जा रहा है ताकि उनको लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ क्लब रक्तदान शिविर का भी आयोजन करने जा रहा है ताकि जरूरतमंद लोगों को रक्त मिल सके। उन्होंने कहा कि इसी तरह क्लब समय-समय पर गरीब लोगों को कंबल आदि वितरण करता रहता है।
श्री छाबड़ा ने बताया कि इस कार्यक्रम की सफल्ता का श्रेय रोटेरियन नवनीत कौर छाबडा, सतेन्द्र छाबडा, मनोहर पुनियानी, जे.पी.मल्होत्रा, पी.जी.एस. सरना आदि को देना चाहेंगे जिनके अथक प्रयासों से ही यह कार्यक्रम इतना सफल हुआ है। साथ ही वह सतीश गुंसाई जिन्होंने क्लब को 21000 रूपये, सुनील अग्रवाल जिन्होंने क्लब की गतिविधियों के लिए 1 लाख 25 हजार रूपये व जी.पी.मक्कड का आभार जतायेंगे जिन्होंने लोहड़ी के इस समारोह में अपना महत्वूपर्ण योगदान दिया।

जानिए लोहड़ी की महत्ता:-
लोहड़ी का पर्व एक मुस्लिम राजपूत योद्धा दुल्ला भट्टी कि याद में पुरे पंजाब और उत्तर भारत में मनाया जाता है। लोहड़ी की शुरुआत के बारे में मान्यता है कि यह राजपूत शासक दुल्ला भट्टी द्वारा गरीब कन्याओं सुन्दरी और मुंदरी की शादी करवाने के कारण शुरू हुआ है। दरअसल दुल्ला भट्टी पंजाबी आन का प्रतीक है। पंजाब विदेशी आक्रमणों का सामना करने वाला पहला प्रान्त था। ऐसे में विदेशी आक्रमणकारियों से यहां के लोगों का टकराव चलता था।
दुल्ला भट्टी का परिवार मुगलों का विरोधी था। वे मुगलों को लगान नहीं देते थे। मुगल बादशाह हुमायूं ने दुल्ला के दादा सांदल भट्टी और पिता फरीद खान भट्टी का वध करवा दिया। दुल्ला इसका बदला लेने के लिए मुगलों से संघर्ष करता रहा। मुगलों की नजर में वह डाकू था लेकिन वह गरीबों का हितेषी था। मुगल सरदार आम जनता पर अत्याचार करते थे और दुल्ला आम जनता को अत्याचार से बचाता था। दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उस समय पंजाब में स्थान स्थान पर हिन्दू लड़कियों को यौन गुलामी के लिए बल पूर्वक मुस्लिम अमीर लोगों को बेचा जाता था।
दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न सिर्फ मुक्त करवाया बल्कि उनकी शादी भी हिन्दू लडको से करवाई और उनकी शादी कि सभी व्यवस्था भी करवाई। सुंदर दास नामक गरीब किसान भी मुगल सरदारों के अत्याचार से त्रस्त था। उसकी दो पुत्रियां थी सुन्दरी और मुंदरी। गांव का नम्बरदार इन लडकियों पर आंख रखे हुए था और सुंदर दास को मजबूर कर रहा था कि वह इनकी शादी उसके साथ कर दे।
सुंदर दास ने अपनी समस्या दुल्ला भट्टी को बताई। दुल्ला भट्टी ने इन लडकियों को अपनी पुत्री मानते हुए नम्बरदार को गांव में जाकर ललकारा। उसके खेत जला दिए और लड़कियों की शादी वहीं कर दी जहां सुंदर दास चाहता था। इसी के प्रतीक रुप में रात को आग जलाकर लोहड़ी मनाई जाती है।
दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया। कहते हैं दुल्ले ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी। इसी कथा की हमायत करता लोहड़ी का यह गीत है, जिसे लोहड़ी के दिन गाया जाता है:
सुंदर मुंदरिए-हो तेरा कौन विचारा-हो
दुल्ला भट्टी वाला-हो
दुल्ले ने धी ब्याही-हो
सेर शक्कर पाई-हो
कुडी दे बोझे पाई-हो
कुड़ी दा लाल पटाका-हो
कुड़ी दा शालू पाटा-हो
शालू कौन समेटे-हो
चाचा गाली देसे-हो
चाचे चूरी कुट्टी-हो
जिमींदारां लुट्टी-हो
जिमींदारा सदाए-हो
गिन-गिन पोले लाए-हो
इक पोला घिस गया जिमींदार वोट्टी लै के नस्स गया-हो! 

दुल्ला भट्टी मुगलों कि धार्मिक नीतियों का घोर विरोधी था। वह सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष था। उसके पूर्वज संदल बार रावलपिंडी के शासक थे जो अब पकिस्तान में स्थित हैं। वह सभी पंजाबियों का नायक था। आज भी पंजाब (पाकिस्तान) में बड़ी आबादी भाटी राजपूतों की है जो वहां के सबसे बड़ें जमीदार हैं।
लोहड़ी दी लख लख बधाईयां

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