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लंदन में सिस्टम हैं पर आदमी नहीं हैं और भारत में आदमी हैं तो सिस्टम नहीं: अमर बंसल

नवीन गुप्ता
फरीदाबाद, 22 जनवरी: भारत और इंग्लैंड में बुनियादी ढांचे का एक बड़ा अंतर है जिसके चलते इंग्लैंड की विकास गति तेज है। यदि भारत में भी आम आदमी के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर सरकार ध्यान दे तो विकास की दिशा में भारत तेजी से अग्रसर हो सकता है। मैट्रो प्लस से अपने अनुभव सांझा करते हुए ये विचार व्यक्त किए इंग्लैंड यात्रा से लौटे प्रमुख समाजसेवी व भारत विकास परिषद् के संरक्षक अमर बंसल ने। उनका कहना है कि इंग्लैंड में आम आदमी के लिए सरकार ने बेहतर सिस्टम विकसित किया है, जैसा भारत में कहीं दिखाई नहीं देता। उनका कहना था कि लंदन में सिस्टम हैं पर आदमी नहीं हैं और भारत में आदमी हैं तो सिस्टम नहीं हैं। लंदन की चमचमाती सड़कों और वहां की व्यवस्था को देख वहां घूमकर अमर बंसल का तो कम से कम यहीं कहना है।
श्री बंसल ने बताया कि वहां की सड़कों की सफाई और रख-रखाव पूरे लंदन में एक जैसा दिखाई देता है, साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था का हर आदमी पालन करता है। अपनी धर्मपत्नी नुपूर बंसल तथा अपने दोस्त टेकपाल सिंह के साथ परिवार सहित लंदन यात्रा पर गए अमर बंसल ने बताया कि इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड में मैडम तुसाद वाक्स म्यूजियम, आक्सफोर्ड यूनिवसिर्टी, लिच फील्ड, स्काटिश पार्लियामेंट, क्वीन पैलेस, अक्षरधाम मंदिर, शेक्सपियर के घर और काऊंसलर हॉल का भ्रमण किया। श्री बंसल अपने भारतीय मूल के मित्र गुरजीत सिंह जो कि पंजाब के रोपड़ जिला के रहने वाले हैं, के निमंत्रण पर दूसरी इंग्लैंड गए थे। गुरजीत सिंह गिल लंदन में पंजाबी भाषा को प्रमोट करने के लिए एक फ्री अकादमी चलाते हैं।
लंदन की यात्रा कि विवरण देते हुए अमर बंसल बताया कि स्काटिश पार्लियामेंट में फ्री एंट्री है और सुरक्षा के लिए हथियारबंद जवान तक तैनात नहीं हैं। यहां पर काम करने वाले लोग सिर्फ आगंतुकों को जानकारी देने का काम करते हैं। 550 साल पुरानी ऐतिहासिक लिच फील्ड चर्च बहुत सुंदर ढंग से बनाई गई है। यह चर्च दुनिया की सबसे बड़ी चर्च का भी दर्जा रखती है।
लंदन आईज की विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि सबसे बड़े इस झूले की खासियत यह है कि उतरने-चढऩे के लिए इन्हें रोका नहीं जाता। चलते झूले में ही लोग सवार होते हैं और नीचे उतरते हैं, जिसके बावजूद बेहतरीन सिस्टम से दुर्घटनाओं का कोई भय नहीं होता।
विश्व प्रसिद्ध लेखक शेक्सपियर के घर के अलावा उन्होंने महारानी के घर को भी देखा। महारानी के घर पर आम आदमी के लिए प्रवेश नहीं है, लेकिन 100 मीटर की दूरी पर लगे बैरिकेड्स से घर देखा जा सकता है। जबकि प्रधानमंत्री के निवास पर तो किसी तरह की बैरिकेड्स नहीं लगी हैं।
अमर बंसल ने अपने परिवार के साथ काऊंसलर हॉल भी देखा जो बहुत ही खूबसूरत बना हुआ है। 120 सदस्यों वाले काऊंसलर सदन में तीन सदस्य भारतीय मूल के हैं। इनमें से एक नवनीत कौर है जो तीसरी बार सदन की काऊंसलर बनी है। यहां काऊंसलर का कार्यकाल चार वर्ष का होता है और काऊंसलर भारतीय विधायकों के दर्जे के समान होते हैं। ये काऊंसलर सीधे संसद से जुड़े होते हैं।
श्री बंसल ने कहा कि भारत बेशक आबादी के हिसाब से बड़ा देश है लेकिन यदि विकास की दीर्घकालीन योजनाएं बनाएं तो भारत भी विकास की तेज गति पा सकता है। इसके साथ ही प्रशासनिक और जन-सुविधाओं से जुड़े मामलों में भी सरकार को बेहतर प्रबंधन करना होगा।

 

 

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