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भ्रष्टाचार उजागर: विजिलेंस ने HPSC के डिप्टी सेक्रेटरी एवं HCS अधिकारी को किया 1.08 करोड़ के साथ गिरफ्तार:


डेंटल सर्जन का Exam क्लीयर कराने के नाम पर अनिल नागर ने ली राशि।
मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट।
चंडीगढ़, 19 नवंबर:
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ‘बिना पर्ची बिना खर्ची’ सरकारी नौकरी के दावे को झुठला विजिलेंस टीम ने नौकरियों में हो रहे बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया है। बता दें, हरियाणा की विजिलेंस टीम ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन @ HPSC के डिप्टी सेक्रेटरी एवं HCS अधिकारी अनिल नागर को रिश्वत के 1 करोड़, 8 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार किया है। ये रकम HPSC की ओर से हाल ही में 26 सितंबर को हुई डेंटल सर्जन की परीक्षा क्लीयर कराने के नाम पर ली गई थी। इस संगीन मामले में गड़बड़ी की भनक लगते ही विजिलेंस ने डिप्टी सेक्रेटरी समेत तीन आरोपियों को दबोच लिया। बता दें कि अनिल नागर हरियाणा में कई जगह SDM रह चुका है और फिलहाल उसके पास हरियाणा सफाई कर्मचारी कमीशन के सचिव का चार्ज भी उसके पास है।
जानकारी के मुताबिक विजिलेंस को ज्यूडिशियल एग्जाम में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। विजिलेंस ने टीम गठित कर गुपचुप तरीके से कार्रवाई की। इस मामले में विजिलेंस ने 17 नवंबर को प्राथमिकी दर्ज कर सूचना के आधार पर छापा मारा और जिला भिवानी निवासी नवीन कुमार को 20 लाख रुपये की नकद राशि स्वीकार करते रंगे हाथ पकड़ा। विजिलेंस ने उसे 18 नवंबर को अदालत में पेश कर उसे 4 दिन के रिमांड पर भेज दिया। प्रदीप से जब विजिलेंस टीम ने गहनता से पूछताछ की तो उसने खुलासा कि यह पैसा अनिल नागर के पास जाना है। रकम को झज्जर निवासी अश्वनी के नाम से लेते हुए बताया कि वह अनिल नागर के नाम पर एक करोड़ रुपए ले रहा है।

अश्विनी को पैसे लेकर भेजा नागर के पास:-
प्रदीप के स्वीकार करने के बाद और जांच के दौरान सामने आए अन्य सबूतों के आधार पर विजिलेंस अधिकारियों ने झज्जर जिले के निवासी अश्विनी शर्मा को गिरफ्तार किया है। उसे रकम समेत अनिल नागर के पास भेजा और कहा कि अनिल नागर को यह पैसा पहुंचाओ। अश्वनी ने नागर से बात की और उसे सेक्टर-11 पंचकूला में बुलाया। जैसे ही HPSC के उप-सचिव एवं HCS अधिकारी अनिल नागर ने उक्त रकम अश्वनी से ली तो विजिलेंस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस टीम ने उसके सूटकेस से 90 लाख रुपए टीम ने बरामद किए हैं।
पूछताछ में पता चला कि नागर की साठगांठ पेपर बनाने वाली एजेंसी और चेक करने वाली एजेंसी से थी। वह उम्मीदवारों को यह बताता था और इसी आधार पर वह रिश्वत ले रहा था। विजिलेंस को पहले से ही इस पर शक था। इसके बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई है।
स्टेट विजिलेंस के मुताबिक डेंटल सर्जन की परीक्षा पास कराने के नाम पर अनिल नागर यह रिश्वत ले रहा था। आरोपियों से 1 करोड़, 7 लाख, 97 हजार रुपए बरामद हुए हैं। विजिलेंस टीम डिप्टी सेक्रेटरी अनिल नागर और अन्य दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रही है। उसके एक सहयोगी के आवास पर तलाशी जारी है, इससे और नकदी बरामद हुई है। सांठगांठ का पता लगाने और सभी दोषियों को पकड़ने के लिए मामले में आगे की जांच जारी है।




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