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दो-दो प्रधानों वाली बन्नूवाल बिरादरी के चुनाव को लेकर विवाद गहराया! संस्था पर सरपरस्तों का कब्जा या कुछ और?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की खास रिपोर्ट।
फरीदाबाद, 22 नवम्बर:
बिना प्रजा के राजा के दरबारियों का दरबार! ये कहावत 24 मेंबर्स वाली उस बन्नूवाल बिरादरी नामक संस्था पर एकदम सटीक बैठती है जिसके गवर्निंग बॉडी के 24 सदस्य तो हैं, लेकिन जरनल बॉडी कोई नहीं। इसे एक जेबी संस्था भी कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं।
चौधर की लड़ाई को लेकर पंजाबियों के शहर NIT में अक्सर किसी ना किसी संस्था को लेकर कोई ना कोई विवाद होता रहता है। चाहे वो फरीदाबाद धार्मिक एवं सामाजिक संगठन हो, चाहे श्रीरामजी धमार्थ को लेकर हो, चाहे श्री सनातन धर्म हनुमान मंदिर एक नंबर मार्किट हो, चाहे संतों का गुरूदारा हो, चाहे विजय रामलीला कमेटी हो या फिर गुरूदारा श्री सिंह सभा, जवाहर कालोनी को लेकर। इन सभी संस्थाओं में खींचतान/विवाद के पीछे दो-चार लोग ही हैं जो सारे विवादों की जड़ बताए जाते हैं।
इस बार जो विवाद है वो है बन्नूवाल बिरादरी फरीदाबाद नामक संस्था को लेकर जिसमें सरपरस्तों सहित मात्र 24 एक्जयूटिव मेंबर बताए जा रहे हैं। हाल-फिलहाल इस संस्था के दो-दो प्रधान बताए जाते हैं एक लोचन भाटिया जोकि रजिस्ट्रार सोसायटी और बैंक के सरकारी रिकार्ड में अभी तक प्रधान हैं,तो दूसरे राजेश भाटिया जोकि बिना कागजों के पिछले करीब दो सालों से हवा में प्रधान हैं। यहां प्रधानी और संस्था के चुनाव को लेकर ही विवाद हैै।
बकौल कांत फरवरी-2022 में संस्था ने रजिस्ट्रार सोसायटी कार्यालय में लिखकर दिया था कि राजेश भाटिया संस्था का प्रधान है। इस पत्र को रजिस्ट्रार सोसायटी ने यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि चुनाव बॉयलाज के मुताबिक नहीं हुए और ना ही इलेक्शन की कोई सूचना कार्यालय को एक्ट के मुताबिक दी गई।
शहर के आरटीआई एक्टीविस्ट कहे जाने वाले आनंदकात भाटिया जोकि भाजपा नेता भी है, के कारण अब इस संस्था पर भी विवाद को काला साया पड़ चुका है। संस्था के 19 नवंबर, 2022 को होने वाले चुनावों को लेकर कांत ने रजिस्ट्रार सोसायटी के पास 17 नवंबर एक ऐसी शिकायत की कि एक ही दिन में संस्था के चुनाव खटाई में पड़ गए। रजिस्ट्रार सोसायटी ईश्वर सिंह यादव ने कांत की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए 18 नवंबर को संस्था के चुनावों पर रोक लगा दी। अब इस बन्नूवाल बिरादरी फरीदाबाद के चुनाव कब होंगे, कोई नहीं जानता।
इस बन्नूवाल बिरादरी फरीदाबाद नामक संस्था की प्रधानी को लेकर सरपरस्तों और गवर्निंग बॉडी या कहिए संस्था के जन्मदाताओं/फाऊंडर मेंबर्स में ही खींचतान की बातें अक्सर सुनाई पड़ती हैं। हर कोई संस्था में अपनी चौधर चाहता है, चाहे वो सरपरस्त हों या फिर सक्रिय मेंबर।
वैसे तो सरपरस्तों का काम होता है कि वो समाज में आपसी मनमुटाव खत्म करा एक-दूसरों को जोडऩे का काम करें, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है।
बन्नूवाल बिरादरी फरीदाबाद के इतिहास में जाते हुए संस्था के विश्वसनीय सुत्रों की मानें तो सर्वश्री लोचन सिंह भाटिया, प्रमोद भाटिया, मनमोहन उर्फ बब्बू भाटिया और दर्शन भाटिया ने मिलकर उक्त संस्था को सन् 2017 में बनाया था। इसके बाद इन लोगों ने बिरादरी के कर्ताधर्ता कहे जाने वाले चंद लोगों के पास जाकर उनको अपना सरपरस्त बना दिया। इन सरपरस्तों में पीर जगननाथ, मोहन सिंह भाटिया, बहादुर सिंह सब्बरवाल, वेद भाटिया, महेन्द्र नागपाल और कंवल खत्री के नाम शामिल हैं जिनमें से महेन्द्र नागपाल का निधन हो चुका है। इनमें से पीरजी की गद्दी पर बैठे होने के कारण चूंकि पीर जगननाथ का बिरादरी पर ज्यादा प्रभाव/आदर था, इसलिए शायद उन्हें संस्था का मुख्य सरपरस्त बना दिया गया। हाल-फिलहाल ये सरपरस्त संस्था पर पूरी तरह काबिज हो चुके बताए जाते हैं जिनका फैसला ही सर्वमान्य होता है चाहे वो मन से हो या फिर बिना मन के।
गद्दी/सीट का नशा तो सर चढक़र बोलता ही है, चाहे वो कोई राजनेता हो या फिर किसी संस्था का कर्ताधर्ता। ये कहावत यहां भी लागू होती है।
संस्था को लेकर कांत ने जो शिकायत की है, उसमें कहा गया है कि उक्त संस्था के सरदार मनजीत सिंह द्वारा संस्था के एक्जयूटिव ग्रुप में डाला गया एक नोटिस/मैसेज उन्हें मिला जो सरदार मोहन सिंह भाटिया द्वारा एक इलेक्शन कमिश्रर के तौर पर लिखा गया था। इस नोटिस में 19 नवंबर को संस्था की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग होने की बात कही गई थी।
कांत का कहना है कि मीटिंग का जो नोटिस जारी किया गया वो संस्था के बॉयलाज के मुताबिक नहीं किया गया और ना ही इसे संस्था की अधिकृत अथॉरिटी यानि प्रधान द्वारा जारी किया गया। यहीं नहीं, नोटिस में सरदार मोहन सिंह भाटिया को संस्था का चुनाव कराने के लिए इलेक्शन कमिश्रर बताया गया है जबकि संस्था की 3 नवंबर को हुई मीटिंग में सरदार मोहन सिंह भाटिया को कभी भी संस्था के लिए इलेक्शन कमिश्रर नियुक्त नहीं किया गया।
कांत ने शिकायत में चुनाव को अवैध रूप से घोषित किया हुआ बताते हुए संस्था के खातों, कार्यप्रणाली आदि पर भी उगंलियां उठाई थी।
इस शिकायत पर कार्यवाही करते हुए रजिस्ट्रार सोसायटी ईश्वर सिंह यादव ने संस्था के चुनावों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए इस मामले में सुनवाई के लिए 22 नवंबर यानि आज की तारीख देते हुए दोनों पक्षों को बुलाया था, लेकिन सुनवाई आज भी नहीं हो सकी।
इस बारे में रजिस्ट्रार सोसायटी ईश्वर सिंह यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि पंचायती चुनाव के चलते इलेक्शन ड्यूटी में होने के कारण डेट स्थगित कर दी गई है जोकि अब 27 नवंबर के रिजल्ट के बाद की लगाई जाएगी।
अब देखना यह है कि इस बन्नूवाल बिरादरी फरीदाबाद के चुनाव हो पाते हैं या नहीं। -क्रमश:

  1. पीर जगननाथ मुख्य सरपरस्त
  2. मोहन सिंह भाटिया सरपरस्त
  3. बहादुर सिंह सब्बरवाल सरपरस्त
  4. वेद भाटिया सरपरस्त
  5. कंवल खत्री सरपरस्त
  6. राजेश भाटिया प्रधान
  7. अजय नाथ उप-प्रधान
  8. प्रदीप झांब उप-प्रधान
  9. मनजीत सिंह चावला महासचिव
  10. राजेन्द्र भाटिया कोषाध्यक्ष
  11. जीत सिंह भाटिया
  12. राजीव कालरा
  13. लोचन भाटिया
  14. मनोहरलाल विज
  15. सतपाल सिंह
  16. बी.डी. भाटिया
  17. मनमोहन भाटिया
  18. दर्शन भाटिया
  19. प्रमोद भाटिया
  20. गुलशन भाटिया
  21. हरीश भाटिया
  22. अनिल भाटिया
  23. प्रदीप खत्री
  24. आनंदकात भाटिया



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