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बडख़ल झील को पुर्नजीवित के लिए हुआ मंथन

सामाजिक संस्थाओं, आमजन, प्रशासनिक अधिकारियों व विधायकों ने मिलकर बडख़ल झील को पुर्नजीवित करने के लिए की चर्चा
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद,14 सितंबर:
फरीदाबाद की बडख़ल झील केवल घूमने का स्थान ही नहीं, बल्कि यहां के पुराने लोगों की खट्टी मिट्टी यादों का स्थान है। आज भी जब बडख़ल झील की बात आती है, तो फरीदाबादवासी भावुक हो उठते हैं और उनके मन में केवल एक ही इच्छा जाग उठती है कि बडख़ल झील को क्या पुर्नजीवित नहीं किया जा सकता है। यह कहना था मुख्य संसदीय सचिव एवं बडख़ल हलके की विधायक सीमा त्रिखा का। मानव रचना इंटरनैशनल यूनिवर्सिटी में आज बडख़ल झील के पुर्नउत्थान के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया। फरीदाबाद प्रशासन ने बडख़ल झील के पुर्नउत्थान को अपनी प्राथमिकता बताते हुए इस बैठक में भूजल पर काम करने वाली अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं, अन्य विभागों व आमजन को आमंत्रित कर उनके सुझाव लिए।
इस बैठक में ग्राउंड वॉटर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व ग्लोबल हाईड्रोलॉजिकल सोल्यूशन के प्रेसिडेंट डॉ. डीके चढ्ढा से मानव रचना इंटरनैशनल यूनिवर्सिटी के सहयोग से प्री-फीसिब्लीटि रिपोर्ट तैयार करने का आग्रह किया गया। बैठक में उपायुक्त डॉ. अमित अग्रवाल, मुख्य संसदीय सचिव व बडख़ल विधायक श्रीमति सीमा त्रिखा, फरीदाबाद के विधायक विपुल गोयल, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अमित भल्ला, जीएसएस के अधिकारी व अन्य संस्थाओं से साइंटिस्ट प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
उपायुक्त डॉ. अग्रवाल ने प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए कहा कि बडख़ल झील को दोबारा से जीवित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए आज अलग अलग संस्थाओं के साथ मंथन कर सुझाव लिए गए हैं कि कैसे इस झील को दोबारा से जीवित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन सुझावों के आधार पर डॉ. डीके चड्डा एक प्री फीलिब्लीटि रिपोर्ट तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बैठक में वेस्ट वॉटर से झील को भरने, नदियों से भरने व कई अन्य सुझाव दिए गए हैं, लेकिन यह सुझाव व्यावहारिक रूप से संभव हैं या नहीं,इसका पता जीएचएस लगाएगी।
इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. डीके चड्डा ने बताया कि सुझाव तो बहुत आते हैं लेकिन जरूरी यह होता है कि क्या वह सुझाव व्यावहारिक रूप से संभव है। जीएचएस हर सुझाव व झील को भरे जाने के सभी तरीकों की डिटेल में स्टडी करके फिसिब्लीटि रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि पानी के कई तकनीकी पहलु होते हैं जिसको आमजन नहीं जानते। इसलिए तकनीकी तौर पर एक ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे बडख़ल झील को दोबारा से भरा जा सके।
वहीं बैठक में मौजूद बडख़ल की विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि बडख़ल झील से लोगों की जिंदगी के खट्ठे मिट्ठे पल जुड़ें हैं। केवल यहीं नहीं इससे जहां टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा वहीं रिवेन्यू में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं बैठक में मौैजूद फरीदाबाद के विधायक विपुल गोयल ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। इस प्लेटफार्म पर सामाजिक संस्थाएं,आमजन, प्रशासनिक अधिकारी, शैक्षणिक संस्थाएं एक साथ आई हैं और उम्मीद है कि इसका नतीजा सकारात्मक निकलेगा।
इस बारे में मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला का कहना है कि प्री-फिसिब्लिटी स्टडी का उदे्श्य ऐसी संभावनाओं को खोजना है जिससे बडख़ल झील को पुर्नजीवित किया जा सकता है।
इस अवसर पर एमआरयू के वाईस चांसलर एनसी वधवा व फैकल्टी ऑफ एप्लाईड साईंसिज के डीन डॉ० जीएल खन्ना, डॉ. एमएम कथूरिया, एडवोकेट कैलाश बिधूड़ी, पाली क्रेशर जोन एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर भड़ाना, जयभगवान शर्मा, चौ. महीपाल भड़ाना, फरीदाबाद नगर निगम के आयुक्त अशोक शर्मा व अधीक्षण अभियंता डीआर भास्कर, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण फरीदाबाद के अधीक्षक अभियंता एके गुलाटी सहित वन विभाग, सिंचाई विभाग सहित कई अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के अलावा कई जाने-माने पर्यावरणविद् भी उपस्थित थे।

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