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अधिकारी और मंत्री ही लागू करते रहे हैं अब तक शिक्षा नीति

नवीन गुप्ता
चंडीगढ़, 1 नवम्बर:
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि प्रदेश में कौशल विकास विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी ताकि ड्रॉप आउट होने वाले विद्यार्थियों के कौशल का विकास करके उन्हें रोजगार के लायक बनाया जा सके। श्री मनोहर लाल गुडगांव में मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से देश के लिए नई शिक्षा नीति बनाने को लेकर आयोजित उत्तरी क्षेत्र कंसल्टेटिव मीटिंग में बोल रहे थे।
इस बैठक में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव नानी, पंजाब के शिक्षा मंत्री सरदार दलजीत सिंह चीमा, हरियाणा के लोक निर्माण मंत्री, राव नरबीर सिंह, सोहना के विधायक, तेजपाल तंवर, गुडग़ांव के विधायक उमेश अग्रवाल तथा उत्तरी भारत के 6 राज्यों के शिक्षा विभागों के सचिव व निदेशक भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पहले शिक्षा नीति उच्च अधिकारियों तथा मंत्रियों द्वारा बनाकर शिक्षण संस्थाओं में लागू की जाती थी अर्थात् शिक्षा नीति टॉप से बॉटम की तरफ चलती रही है लेकिन अब देश में पहली बार गांव, खंड, जिला तथा राज्य स्तर पर मंथन करके अपने सुझाव राष्ट्रीय स्तर पर नई शिक्षा नीति बनाने के लिए भेजा जा रहे हैं। अब नीति बनाने का कार्य बोटम से टॉप की तरफ हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मंथन के बाद जो प्रारूप तैयार होगा उससे अच्छी शिक्षा नीति बनेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा गुणात्मक और रोजगारोन्मुखी होनी चाहिए, जबकि पहले हमारी शिक्षा में 3,आर तथा रीडिंग, राइटिंग और अरिथमैटिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने देश में स्किल डेवलपमेंट मिशन बनाया है ताकि युवाओं और कम पढ़े लिखे लोगों के कौशल का विकास करके उन्हें रोजगार के लायक बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तर्ज पर हरियाणा में भी स्किल डेवलपमेंट मिशन का गठन किया गया है और प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव तैयार करके मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा गया है। उन्हें उम्मीद है कि इस प्रस्ताव को मंत्रालय से मंजूरी मिल जाएगी ।
मनोहरलाल ने कहा कि स्कूलों से किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोडऩे वाले तथा ड्रॉप आउटस को भी हमें संभालना है और इस दिशा में स्किल डेवलपमेेंट मिशन अहम भूमिका अदा करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ प्रदेश में गुड गर्वनेंस भी शुरू किया गया है और ई-गर्वेनेंस के लिए हरियाणा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रश्ंासा-पत्र भी मिला है, लेकिन हम प्रशंसा-पत्र के लिए नहीं बल्कि लोगों को सरल व शीघ्र मूलभूत सुविधाएं उनके घर-द्वार पर पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के शासनकाल में सरकार ने उम्मीद से ज्यादा काम किया है और भविष्य में भी लोगों की उम्मीद के अनुरूप काम करके प्रदेश को वास्तव में हर क्षेत्र में नंबर वन बनाने का प्रयास करेंगे।
इस मौके पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने राष्ट्रीय स्तर पर नई शिक्षा नीति बनाने के लिए उत्तरी भारत के राज्यों की कंसल्टेटिव मीटिंग आयोजित करने के लिए हरियाणा का आभार जताया और कहा कि बहुत कम समय में अच्छे प्रबंध किए गए हैं।
इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंंत्री, केन्द्रीय मंत्री तथा अन्य प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों व अधिकारियों ने लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर,उनके चित्र पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय सरदार पटेल ने 565 रियासतों को मात्र 100 दिन में एक सूत्र में पिरोकर संगठित भारत का निर्माण किया था। आज की कंसल्टेटिव मीटिंग में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने उत्तर भारत के राज्यों के शिक्षा मंत्रियों तथा अधिकारियों से नई शिक्षा नीति पर सुझाव मांगे। ज्यादातर राज्यों ने नौवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को फेल नहीं करने की नीति में बदलाव करने का सुझाव दिया और कहा कि इससे विद्यार्थियों में पढने की आदत कम हो गई है। इससे शिक्षकों की जिम्मेदारी भी तय करने में कठिनाई आ रही है क्योंकि वे कहते हैं कि पहले विद्यार्थियों ने पढ़ाई नहीं की और नौवीं कक्षा में उनका आधार नहीं बन सकता। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों में लगे शिक्षकों की टै्रनिंग करवाने का भी सुझाव दिया गया।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि हरियाणा ने लड़कियों तथा वोकेशनल शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग किए हैं और विद्यालयों को संस्कार सक्षम बनाने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 422 विद्यालयों में वोकेशनल शिक्षा शुरू की गई है । इसके अलावाए सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट स्कूलों की तरह मासिक पेरेंट-टीचर मीटिंग शुरू की गई है और जल्द ही विद्यालयों में अध्यापकों की हाजिरी के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस प्रणाली शुरू की जाएगी।




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