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कुर्सी व पॉवर का डर दिखाकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निजी स्कूलों के प्राचार्यों को किया जा रहा है प्रताडि़त

जिला शिक्षा अधिकारी के गैर-कानूनी रूप से जारी फरमान के खिलाफ एचपीएससी हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दायर करेगी 

नवीन गुप्ता

फरीदाबाद, 20 अप्रैल: प्रदेशभर के प्राइवेट स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा गैर-कानूनी रूप से विभिन्न मदों में जो फरमान जारी किए गए उसको हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना मानते हुए हाईकोर्ट में एक रिव्यू याचिका दायर की जाएगी। यहीं नहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निजी स्कूलों के प्राचार्यों को अपनी कुर्सी व पॉवर का डर दिखाकर जिस तरीके से प्रताडि़त किया जा रहा है उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए स्कूल संचालकों को जो भी कदम उठाना पड़ेगा, वो उठाया जाएगा। चाहे इसके लिए स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद क्यों न करना पड़े। इस आशय का फैसला प्रदेशभर के सीबीएसई तथा आईसीएसई से संबंद्व प्राईवट स्कूलों की रजिस्ट्रर्ड संस्था हरियाणा प्रोग्रेस्सिव स्कूल्स कांफ्रेंस (एचपीएससी) द्वारा आज सैक्टर-16ए स्थित ग्रेंड कोलम्बस स्कूल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में लिया गया। एचपीएससी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस गोंसाई की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एचपीएससी के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र, जिला सचिव डा० सुमित वर्मा, एचएस मलिक, मनोरमा अरोड़ा, डा० सुभाष श्योराण, यूएस वर्मा, दीपक यादव, सीएल गोयल, एसएस चौधरी, हिसार से कर्नल केएस सैनी, यमुनानगर से कर्नल एमएस साहनी, रोहतक से अंशुल पठानिया तथा डा० रवि गुगनानी, सोनीपत से आशीष, गुडग़ांव से कर्नल प्रताप व मुकेश डागर, पलवल से युद्ववीर सिंह, साकेत भाटिया तथा बीडी शर्मा आदि प्रदेश भर से आए विभिन्न स्कूल संचालक विशेष तौर पर मौजूद थे।
इस बैठक में आए स्कूल संचालकों ने अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुुए कहा कि आरटीई व 134ए तथा हुडा ईडब्ल्यूएस के नाम पर शिक्षा विभाग व प्रशासनिक अधिकारी प्राइवेट स्कूलों में 45 प्रतिशत बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के लिए जो रास्ता अख्तियार कर रहे हैं, वह नाज़ायज व गैर-कानूनी है। इन्होंने कहा कि यदि प्राइवेट स्कूल 45 प्रतिशत सीटें रिजर्व करके चलेंगे तो उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि वे अपना स्कूल किस प्रकार चलाएंगे। बैठक में यह भी फैसला लिया गया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा प्राइवेट स्कूलों को दिए गए पत्र को यदि वापिस नहीं लिया गया और प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही की गई तो एचपीएससी द्वारा उसका खुला विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा किसुप्रीम कोर्ट ने टीएमए पाई बनाम कर्नाटक सरकार में 11 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने निर्देशित किया हुआ है कि गैर-सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र के विद्यालयों को अपनी फीस निर्धारित करने की स्वायतता मिलनी चाहिए। यहीं नहीं अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि निजी क्षेत्र के स्कूलों की आय से एकत्रित धन पर अकुंश नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि हर विद्यालय को विकास एवं विस्तार के लिए धन की आवश्यकता होती हैं। इसलिए राशि असीमित होते हुए भी इन्कम टैक्स से मुक्त होगी। इसके अलावा बैठक में यह भी बताया गया है कि गत् 6जुलाई, 2012 को हरियाणा के शिक्षा निदेशक ने निजी स्कूलों को 20 प्रतिशत से ज्यादा फीस न बढ़ाने का आदेश जारी किया जिसको कि हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। रही बात शिक्षा नियमावली की धारा 134 तथा 134ए की तो इस धारा में सरकार ने स्वयं छ: बार बदलाव किया है। यदि यह तर्कसंगत होती तो सरकार इसमें बदलाव क्यों करती। यह मामला एचपीएससी द्वारा हाईकोर्ट में याचिका न० 4925/2014 के तहत डाला गया था जिसमें हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि कक्षा एक तक सभी निजी विद्यालय 25 प्रतिशत बच्चों को सर्व शिक्षा अधिकार के तहत दाखिला देंगे न कि 134ए के तहत और इसका भुगतान सरकार आरटीई एक्ट के तहत करेगी। वह भी तब जब सरकार ने निजी क्षेत्र के स्कूल को लेबरहुड स्कूल का दर्जा दिया हो। इस प्रकार पहले कक्षा निजी स्कूलों को दाखिले के लिए ईडब्ल्यूएस/बीपीएल दाखिले के लिए सरकारी आदेश की अवेहलना नहीं झेलनी पड़ेगी। कोर्ट के आदेशानुसार दूसरी से आठवीं तक ईडब्ल्यूएस/बीपीएल के अन्तर्गत मेरिटोरियस छात्रों के लिए 10 प्रतिशत सीटें होंगी जिसका खर्चा सरकार उसी आधार पर देगी जो आरटीई के अन्तर्गत 2009 के 2(सी), 2(1) तथा 2(2)में वार्णित है। प्रश्र उठता है कि बच्चों के दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट कैसे निर्धारित करेंगे तो बैठक में फैसला हुआ कि दाखिला लेने के पात्र छात्रों की परीक्षा पुस्तिका व प्रश्र पत्र डीईओ और बीईओ से मांगा जाए। और यदि अधिकारी इसे देने में आनाकानी करे तो उसे जनसूचना अधिकार के तहत मांगा जाए अन्यथा अदालत का दरवाजा खटखटाया जाए। यहीं दशा नौंवीं तथा 11वीं में होगी। बैठक में सदस्यों ने सुझाव दिया कि डीईओ से पूछा जा सकता है कि एडमीशन के लिए वे जिन बच्चों को भेजेंगे उनके क्या-क्या दस्तावेज देखे जाएंगे, उनकी शिक्षा का खर्चा कितना मिलेगा, उसको प्राप्त करने की क्या विधि होगी और वह कितने समय में मिलेगा।
इस अवसर पर एचपीएससी के प्रदेश अध्यक्ष गोंसाईं ने कहा कि कुछ दिन पहले शहर के कुछ स्कूलों को हुडा के संपदा अधिकारी ने 17(3) का नोटिस देकर उन्हें 30 मार्च को अपने सामने पेश होने का आदेश दिया था। इसके चलते स्कूल संचालकों ने संपदा अधिकारी से मिलकर जमीन एलॉटमेंट की शर्तो की पालना हेतु जानकारी दी। चंूकि हुडा ने अपनी तरफ से न तो ईडब्ल्यूएस की परिभाषा दी और न ही ईडब्ल्यूएस/बीपीएल का कोई छात्र स्कूल में एडमीशन के लिए भेजा। श्री गोंसाईं ने कहा कि स्कूलों में आज शर्तो से भी अधिक छात्र नि:शुल्क शिक्षा ले रहे है। इस पर हुडा अधिकारियों का कहना था कि आप 134ए या आरटीई के तहत जो भी दाखिला लेते है उन्हें उससे कोई लेना-देना नहीं है। वे तो सिर्फ हुडा की शर्तो के अनुसार 20 प्रतिशत रिजर्वेशन सुनिश्चित करना चाहते हैं।
बैठक में एचपीएससी के पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व अपने द्वेष भावना से स्कूलों की शान्ति को भंग करने का प्रयास कर रहे है जिसको किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्कूली शिक्षा प्रदान करना सरकार का दायित्व है और यदि प्राइवेट स्कूल अभिभावकों की इच्छानुसार गुणवत्ता वाली शिक्षा अभिभावकों के निजी खर्चे पर उन्हें प्रदान कर रहे है तो एक तरह से हम लोग सरकार का बोझ ही कम कर रहे हैं। इसलिए सरकार को चाहिए वह निजी क्षेत्र के विद्यालयों को प्रोत्साहित करे न कि गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के पीछे पड़कर उनकी शिक्षा व्यवस्था को चौपट करे। बैठक में कहा गया कि सरकार के भारी-भरकम खर्चे, लंबे-चौड़े सरकारी अमले और तमाम दावों के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता सरकारी स्कूलों में शून्य है। और यदि सरकार इसी तरह से प्राइवेट स्कूलों के कामकाज में दखलंदाजी करेंगी तो इन स्कूलों की गुणवत्ता भी खटाई में पड़ जाएगी।p-3 p-4 p-5 p-2 _DSC0274 p-1 p-6




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