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अरावली के अवैध फार्म हाऊसों पर अब कब चलेगा तोडफ़ोड़ के लिए पीला पंजा, जानें?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की खास रिपोर्ट
फरीदाबाद, 13 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट में चल रही जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर वन विभाग द्वारा अरावली का चीरहरण कर अवैध रूप से बनाए गए फार्म हाऊसों पर तोडफ़ोड़ की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। मंगलवार 10 अगस्त से शुरू हुई इस तोडफ़ोड़ की कार्यवाही में जो फार्म हाऊस या चारदीवारी तोड़ी गई हैं, उसको लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठनी शुरू हो गई थी। मैट्रो प्लस ने भी इस खबर को प्रसारित किया कि वन विभाग द्वारा चूज एंड पिक की नीति के तहत तोडफ़ोड़ की कार्यवाही की जा रही है, जिसकी लोगों में खुब चर्चा रही। लोगों का कहना है कि जब वन विभाग को तोडफ़ोड़ की कार्यवाही करनी है तो वो निष्पक्ष होकर उसे एक तरफ से अनखीर या फिर अनंगपुर की तरफ से सीधे-सीधे करे ना कि चूज एंड पिक की नीति को अपनाते हुए करे।
बता दें कि तीन दिन हुई तोडफ़ोड़ की कार्यवाही को लेकर आरोप लगाए जा रहे थे कि वन विभाग नोडल एजेंसी के रूप में नगर निगम से जो तोडफ़ोड़ की कार्यवाही करा रहा था, वो तर्कसंगत नहीं थी। पहले दिन वन विभाग ने दो जगह जो तोडफ़ोड़ की कार्यवाही को अंजाम दिलवाया, वो दोनों जगह एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी जबकि दूसरे दिन अनखीर-सूरजकुंड रोड़ पर जो तोडफ़ोड़ की गई, वो रोड़ से अंदर जाकर थी। हां, तीसरे दिन की तोडफ़ोड़ जरूर रोड़ पर लगती चारदीवारी को ढहाने के लिए की गई तो किसी सेठी माईंस वाले की बताई जा रही है, जबकि इससे पहले की तोडफ़ोड़ भाजपा नेता संदीप चपराना, कमल जख्मी और पूर्व मंत्री विपुल गोयल के फार्म हाऊसों पर की गई।
अब बताया जा रहा है कि मैट्रो प्लस में वीरवार, 12 अगस्त को इस बारे में खबर चलने के बाद इसकी गूंज शायद चंडीगढ़ तक पहुंची। बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ से निर्देश मिलने के बाद कल वीरवार को ही इस मामले में एकाएक जिला उपायुक्त ने वन विभाग द्वारा की जा रही तोडफ़ोड़ को लेकर जो ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए थे, उनको बदल दिया। जिला उपायुक्त ने बतौर जिला मजिस्ट्रेट अब नगर निगम के चार कार्यकारी अभियंताओं क्रमश: मनोज कुमार, जीपी वधवा, ओमदत्त और ओपी कर्दम को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करते हुए मनोज कुमार और जीपी वधवा को संबंधित एसीपी तथा ओमदत्त और ओपी कर्दम को इंफोर्समेंट/तोडफ़ोड़ के साथ अटैच कर दिया। ये आदेश 13 अगस्त से 10 सितंबर तक के लिए किए गए हैं। आदेशों में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में ये ड्यूटी मजिस्ट्रेट उक्त समयावधि में अनखीर, मेवला-महाराजपुर और अनंगपुर की राजस्व संपदा के अंदर वन क्षेत्र में अवैध रूप से बने फार्म हाऊसों और बैंक्वेट हॉल में की जाने वाली तोडफ़ोड़ केे दौरान लॉ एंड आर्डर बनाए रखने का काम करेंगे।
वीरवार के आदेशों को देखकर लगता है कि अब जिला प्रशासन ने तोडफ़ोड़ के इस मामले में कड़ा रूख अपना लिया है। हालांकि आज भी तोडफ़ोड़ होनी थी, लेकिन बताया जा रहा है कि गुरूग्राम में वन विभाग हरियाणा की प्रिंसीपल सेक्रेटरी जी. अनुपमा के साथ उच्च अधिकारियों की मीटिंग होने के चलते आज की तोडफ़ोड़ की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया था। इस मीटिंग में फरीदाबाद जिले के वन अधिकारी राजकुमार यानि डीएफओ भी शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में फरीदाबाद के साथ-साथ गुरूग्राम के अरावली क्षेत्र में अवैध रूप से बने फार्म हाऊसों और अन्य ईमारतों पर की जाने वाली कार्यवाही को लेकर चर्चा हुई है।
मीटिंग के बारे में जानकारी लेने के लिए जिला वन अधिकारी राजकुमार से बात की गई तो उनका कहना था कि मैडम ने दोनों जिलों में कार्यवाही को लेकर स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी जो दे दी गई। वहीं जब उनसे चूज एंड वाले मामले में बात की गई तो उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में 27 अगस्त की तारीख से पहले उनकी कोशिश होगी कि नगर निगम के साथ मिलकर सभी अवैध निर्माणों को सफाया कर दें।
वहीं ड्यूटी मजिस्ट्रेट बदले जाने के कारणों को लेकर जब जिला उपायुक्त जितेन्द्र यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि रोटेशन के चलते इनमें बदलाव किया गया है। चूंकि इनसे पहले लगाए गए ड्यूटी मजिस्ट्रेट दूसरे विभागों के थे, जिससे उनके ऑफिस के कामों में दिक्कत आ रही थी, इसलिए पहले वाले ड्यूटी मजिस्ट्रेट बदलकर अब नगर निगम से ही चारों ड्यूटी मजिस्ट्रेट लगाए गए हैं ताकि सुचारू रूप से काम चल सके।
वहीं अरावली में अवैध निर्माणों पर अब स्वतंत्रता दिवस के चलते कल शनिवार की बजाए सोमवार से फिर से तोडफ़ोड़ की कार्यवाही शुरू की जाएगी। इसकी पुष्टि निगमायुक्त यशपाल यादव ने की है।
वहीं अब देखना यह होगा कि संभवत: कल शनिवार से या फिर 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस के बाद की जाने वाली यदि तोडफ़ोड़ की कार्यवाही को वन विभाग द्वारा किस तरह से अंजाम दिया जाता है।

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