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अरावली का चीरहरण करने वाले सफेदपोशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या होगा? पढ़ें!

अरावली वन क्षेत्र व पीएलपीए नोटिफाई जमीन में हुए सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे: उपायुक्त
अतिक्रमण वाली जमीन पर 130 से 140 के बीच अवैध स्ट्रक्चर/निर्माण हैं, जिन्हें हटाया जाएगा!
माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अक्षरश: पालना की जाएगी: उपायुक्त
मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की खास रिपोर्ट
फरीदाबाद, 28 जुलाई
: अरावली का चीरहरण करने वाले सफेदपोशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसारपर यदि सही तरीकों से और ईमानदारी से अमल हुआ तो अरावली क्षेत्र में हुए उन सभी अवैध निर्माणों का सफाया हो जाएगा जिन्होंने प्रकृति/नेचर से खिलवाड़ करते हुए यहां अपनी ऐशगाह के लिए फार्म हाऊस, धंधे के लिए शिक्षण संस्थान, यूनिवर्सिटी, धार्मिक स्थल, बैंक्वेट हॉल आदि बनाए हुए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को क्रियान्वित होने से रोकने के लिए देशभर के नामी-गिरामी वकीलों से प्रभावित होने वाले लोगों ने कानूनी सलाह लेनी शुरू कर दी है। वहीं, इस मामले में तर्क दिया जा रहा है कि जब अरावली क्षेत्र में बनी लाईसैंसी कालोनी कांत इंक्लेव तक टूटने से नहीं बचा जहां देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अहमदी तक स्वयं रहते थे, और आजकल तो खोरी में भी तोडफ़ोड़ चल रही है, तो ऐसे में फार्म हाऊस रूपी फार्म हाऊस, नामी-गिरामी शिक्षण संस्थान, यूनिवर्सिटी, धार्मिक स्थल और फार्म हाऊसों की शक्ल में हुए अवैध निर्माणों को टूटने से कैसे रोका जा सकता हैं या कहिए बचाया जा सकता है। इनमें कई तो सरकारी होटल/क्लब आदि भी शामिल हैं।
बता दें कि 23 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के पुन: आदेशों के बाद से पूरे हरियाणा में हडकंप सा मच गया है। खासतौर पर उन ऐशगाह मालिकों, शिक्षण संस्थानों, कई पूर्व मंत्रियों, राजनेताओं, विपक्षी पार्टी के नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों में जिनके नामी-बेनामी फार्म हाऊस यहां बने हुए हैं।
हालांकि अधिकारियों ने साफ तौर पर अभी तक यह नहीं बताया कि इनमें से किन-किन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गाज गिरेगी, लेकिन आज हुई प्रैस कांफ्रेंस में मैट्रो प्लस द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में जिला वन अधिकारी राजकुमार ने मानव रचना और अरावली नामक शिक्षण संस्थानों का खुलकर नाम लेते हुए बताया कि इन्हें भी चिन्हित किया गया है जिनमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पूूरी तरह से तोडफ़ोड़ की कार्यवाही की जाएगी।
काबिलेगौर रहे कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी अशोक खेमका ने हरियाणा सरकार से RTI के तहत अरावली क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों/अतिक्रमणों से संबंधित जानकारी मांगी थी। वहीं बडख़ल से विधायक सीमा त्रिखा ने भी विधानसभा में अरावली के चीरहरण को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। बताते है कि सदन में उस समय वन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने विधायक सीमा त्रिखा को जो रिपोर्ट सौंपी थी और RTI में इस संबंध में जो जानकारी/लिस्ट सरकार ने अशोक खेमका को उपलब्ध कराई थी, वो दोनों ही अलग-अलग थी। मतलब अधिकारियों ने गुमराह करने के लिए शायद ये दोनों रिपोर्ट/लिस्ट अलग-अलग दी थी।
जबकि जिला प्रशासन की तरफ से जिला उपायुक्त और जिला वन अधिकारी राजकुमार की अधोहस्ताक्षरित अरावली क्षेत्र के अवैध निर्माणों संबंधी जो रिपोर्ट/लिस्ट जून-2020 में सोनिया घोष बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा केस में NGT में जमा कराई थी उसमें भी कई तरह की खामियां नजर या कहिए छुपाव/बचाव नजर आ रहे हैं जिसका खुलासा पूरी लिस्ट सहित मैट्रो प्लस की अगली खबर में किया जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ बता दें कि जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद अरावली क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों पर पीला पंजा चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी संदर्भ में जिला उपायुक्त यशपाल ने आज बताया कि कि खोरी क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब अरावली वन क्षेत्र सहित जिले की पंजाब लैंड प्रिवेंशन एक्ट-1900 (पीएलपीए) के तहत चिह्नित पूरी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इसके लिए सभी अवैध फार्म हाउसों, शिक्षण संस्थानों व अन्य निर्माण मालिकों को चार दिन का नोटिस दिया जाएगा और अगर इस बीच वह स्वयं अपने अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ प्रशासन द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उपायुक्त यशपाल बुधवार को लघु सचिवालय में नगर निगम आयुक्त डॉ.गरिमा मित्तल, DCP NIT डॉ.अंशु सिंगला व DFO राजकुमार के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता कर रहे थे।
पत्रकार वार्ता में उपायुक्त यशपाल ने बताया कि वन विभाग इस मामले में नोडल विभाग है और जिला वन अधिकारी की तरफ से सभी को क्षेत्रों को नोटिफाई किया गया है। इस मुद्दे पर पिछले वर्ष जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT)को भी रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसके अलावा पूरे क्षेत्र का ड्रोन से सर्वे भी करवाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों में यह स्पष्ट है कि PLPA की जमीन को पूरी तरह से अवैध कब्जों से मुक्त करवाया जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से खोरी क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है उसके साथ-साथ ही इन अवैध निर्माणों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद अगर अवैध निर्माण को मालिक स्वयं नहीं हटाता है तो प्रशासन उसे हटाने की कार्रवाई करेगा और उसका खर्च भी मालिक से ही वसूल किया जाएगा।
वहीं पत्रकार वार्ता में जिला वन अधिकारी राजकुमार ने बताया कि फरीदाबाद जिले में PLPA की लगभग 5430 हैक्टेयर जमीन है और इसमें से 1430 एकड़ यानि 500 हैक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है। उन्होंने कहा कि बडख़ल, अनखीर, मांगर, पाली, मेवला-महाराजपुर, कट्टन पहाड़ी आदि अरावली क्षेत्र की इस जमीन पर 130 से 140 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जो निर्देश दिए गए हैं, उन्हीं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कल यानि वीरवार से उक्त संदर्भ में अवैध निर्माणकर्ताओं को 3-4 दिन समय देकर नोटिस देने शुरू कर दिए जाएंगे और उसके बाद तोडफ़ोड़ की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
इस दौरान नगर निगम आयुक्त डॉ. गरिमा मित्तल ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय का उक्त बारे में आदेश स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में जितनी भी वन क्षेत्र के अंतर्गत पीएलपीए की जमीन है, जब भी वन विभाग कहेगा वहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम की तरफ से हर तरह की लोजेस्टिक की सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि खोरी क्षेत्र में जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस के पूर्ण तालमेल के साथ कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि हम निर्धारित समय में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करेंगे।
वहीं उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद शहर के अंदर से भी अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक खोरी क्षेत्र से 700 से अधिक लोगों ने पुर्नवास योजना के तहत आवेदन किया है। -क्रमश:




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