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NSUI के संघर्ष से BJP सरकार ने छात्रहित में घुटने टेके: विकास फागना

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
नॉन-फाइनल ईयर छात्रों को बिना परीक्षाओं के किया जाएगा प्रोमोट
एकमात्र एनएसयूआई ने ही ऑनलाइन पेटिशन से कोर्ट तक जंग लड़कर छात्रहित में करवाया फैसला
फरीदाबाद, 13 जून:
एनएसयूआई के संघर्ष के समक्ष भाजपा सरकार ने घुटने टेक दिए हैं, सरकार ने एनएसयूआई के कड़े संघर्ष के बाद कोरोना महामारी के चलते प्रदेश के कालेज, आईटीआई व पॉलिटेक्निक मे पढऩे वाले नॉन-फाईनल ईयर के सभी छात्रों को बिना परीक्षा के प्रमोट किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा एक आदेश जारी कर छात्रहित में यह फैसला लिया गया है। प्रदेश में छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही प्रमोट करने के लिए एनएसयूआई हरियाणा काफी समय से संघर्षरत थी जिसके लिए ऑनलाइन पेटिशन से लेकर विभिन्न विश्वविद्यालयों के उप-कुलपतियो को ज्ञापन, प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री तथा महामहिम राज्यपाल को निरन्तर ज्ञापन भेजने से लेकर हाईकोर्ट की शरण लेने तक एनएसयूआई ने छात्रों को बिना परीक्षाओं के प्रोमोट करने की मांग को पूरा करवाने में कोई कसर नही छोड़ी।
विकास फागना ने बताया कि एनएसयूआई हरियाणा के अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा व प्रदेश के तमाम छात्रों व संगठन के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के मेहनत का ही फल है कि सरकार को मजबूरन छात्रहित में फैसला लेना पड़ा। एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष विकास फागना ने बताया कि जहां एक तरफ तमाम छात्र संगठन एनएसयूआई के मांग के खिलाफ सरकार के पिट्ठु बने बैठे रहे वहीं एनएसयूआई ने मजबूती से छात्रों की मांग को उठाया।
उन्होंने कहा कि अभी भी फाइनल सत्र के छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही प्रोमोट करवाने की लड़ाई को निरन्तर लड़ा जाएगा और जल्द ही छात्र हितों में काम करवाया जाएगा। एनएसयूआई के कठिन प्रयासों के बाद सरकार के आदेशानुसार सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक के तमाम नान-फाइनल सत्र के छात्रों को बिना परीक्षाओं के ही प्रोमोट करने के आदेश जारी किए गए है जिसमें छात्रों के पिछले सत्र के 50 प्रतिशत तथा इस सत्र के इंटरनल असेसमेंट के 50 प्रतिशत अंकों को जोड़कर रिजल्ट निकाला जाएगा। वही जो फाइनल सत्र के छात्र प्रदेश से बाहर है उनको भी सरकार द्वारा राहत देने का काम एनएसयूआई की मांग पर ही किया गया है।
विकास फागना ने बताया कि फाइनल सत्र के हरियाणा में रहने वाले छात्रों को भी बिना परीक्षाओं के ही 10 प्रतिशत ग्रेस अंकों के साथ डिग्री दी जानी चाहिए क्योंकि प्रदेश में हालात सामान्य नही है व विशेषज्ञों के अनुसार अभी हालात सुधरने में समय लगेगा। इसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा आदेश दिए गए है कि फाइनल सत्र की परीक्षाओं के समय हॉस्टल बन्द रहेंगे, ऐसे में जो छात्र देहात व ग्रामीण इलाकों व अन्य इलाकों से विश्वविद्यालयो व महाविद्यालयो आदि में पढ़ते है उनके लिए सरकार ने कोई प्रावधान नही किया जबकि प्रदेश में सरकारी व अन्य ट्रांसपोर्ट की खस्ता हालत से हर कोई वाकिफ है। इसके साथ ही परीक्षाओं के समय अलग-अलग जिलों व इलाकों से छात्र परीक्षाएं देने आएंगे तो वही परीक्षा अटेंडेंस लिस्ट पर हस्ताक्षर करने से लेकर अन्य माध्यमो से संक्रमण फैलने का ख़तरा है।
उन्होंने कहा कि अगर फाइनल सत्र के एक विद्यार्थी जो हरियाणा के बाहर से आता है उसे बिना लिखित परीक्षा के प्रमोट करना व एक जो फाइनल ईयर का है, पर हरियाणा में रहता है उससे लिखित परीक्षा लेने का फैसला यह संविधान के आर्टिकल 14 (समानता के अधिकार) की भी अवहेलना है, ऐसे में छात्रहित में राज्य सरकार को फाइनल सत्र के सभी छात्रों को तुरन्त नॉन-फाइनल सत्र के छात्रों की भांति प्रोमोट कर देना चाहिए।

एनएसयूआई की हुई जीत, सरकार ने छात्रों के जनरल प्रोमोशन के दिए आदेश: कृष्ण अत्री
वहीं दूसरी तरफ एनएसयूआई हरियाणा के प्रदेश महासचिव कृष्ण अत्री ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि छात्रों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोमोट कराने के मामले में एनएसयूआई ने बड़ी जीत हासिल की है। पिछले 1 महीने से एनएसयूआई हरियाणा के पदाधिकारियों ने प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्रों के जनरल प्रोमोशन को लेकर मुहिम छेड़ी हुई थी। जिसके परिणामस्वरूप हरियाणा की खट्टर सरकार को एनएसयूआई हरियाणा के पदाधिकारियों की मांग को मानना पड़ा और आज सभी यूनिवर्सिटी और उनसे संबंधित कॉलेजों में पढऩे वाले छात्रों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोमोट करने के आदेश जारी किये हैं।
कृष्ण अत्री ने कहा कि आज ही छात्रों के जनरल प्रोमोशन को लेकर सभी यूनिवर्सिटियों को आदेश दिए गए है। कृष्ण अत्री ने बताया कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन लगा हुआ था और देश-प्रदेश की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में छात्रों की कक्षाएं नहीं लग पाई थी। कक्षा ना लगने के कारण छात्रों में परीक्षाओं को लेकर रोष था। छात्रों का समर्थन करते हुए एनएसयूआई ने परीक्षाओं का विरोध करते हुए, बिना परीक्षा लिए छात्रों के जनरल प्रोमोशन की मांग की थी। इस मांग को लेकर एनएसयूआई ने प्रत्येक यूनिवर्सिटी के उपकुलपति, शिक्षामंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और यहां तक की कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था और आज उसी संघर्ष के परिणाम स्वरूप मांग में सफलता भी मिली है जिसका एनएसयूआई खुले दिल से समर्थन करती है।
इस मौके पर कृष्ण अत्री ने फाइनल ईयर के छात्रों को इस जनरल प्रोमोशन से वंचित रखने पर खट्टर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा लेना उनकी जान के साथ खिलवाड़ है, जिस तरह से प्रथम, द्वितीय वर्ष के छात्रों का जीवन कीमती है उसी तरह फाइनल ईयर के छात्रों का जीवन भी कीमती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों की भांति तीसरे वर्ष के छात्रों को भी बिना परीक्षा लिए अन्य किसी माध्यम से प्रोमोट करने का काम करे नहीं तो एनएसयूआई इनके हक के लिए भी अपनी लड़ाई जारी रखेगी।




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