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सरकार को करोड़ों रूपये के राजस्व का चुना लगा रहे है शहर में चल रहे अवैध बार

नवीन गुप्ता
फरीदाबाद: शहरभर में चल रहे दर्जनों अवैध बार जहां प्रदेश सरकार को करोड़ों रूपये प्रतिवर्ष राजस्व का चुना लगा रहे है वहीं इन अवैध बारों के कारण उन होटल व्यवसायियों का बिजनेस भी प्रभावित हो रहा है जिन्होंने की लाखों रूपये की लाइसैंस फीस जमा कर सरकार से बार परमिट ले रखे है। ऐसे होटल मालिकों ने एयरकंडीशनर बार खोलने तथा उसकी साज-सज्जा में भी लाखों-करोड़ों रूपये खर्च किए हुए है खासकर एनआईटी क्षेत्र में। शहर में हरियाणा टूरिज्म तथा जिमखाना क्लब के अलावा शहर के चंद गिने-चुने होटलों तथा रेस्टोरेंट मालिकों ने ही हरियाणा सरकार से बार के लाइसैंस ले रखे है लेकिन ज्यादातर होटलों में ग्राहकों को शराब अवैध रूप से पिलाई जाती है खासकर इन होटलों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं पार्टियों में। सरकार से जिन लोगों ने लाखों रूपये की फीस भर कर बार लाइसैंस ले रखे है उनमें हरियाणा टूरिज्म तथा जिमखाना क्लब के अलावा शहर के चंद प्राइवेट होटल व रेस्टोरेंट शामिल है। शराब ठेकेदारों ने भी शहर में काफी आहाते खोले हुए है जिनकी एवज में भी आबकारी विभाग शराब ठेकेदार से ठेके की एक प्रतिशत रकम वसूलता है।

शहर में खुले हुए जिन-जिन रेस्टोरेंटों, होटलों, गेस्ट हाउसों तथा बेंक्वेट हॉल में लोगों को शराब परोसी जाती है वह सब गैर-कानूनी है। सेक्टर-17, 16, 7 तथा अम्बेडकर चौक बल्लभगढ़ स्थित अनेक होटलों तथा सरकारी पार्को में भी खुलेआम स्थानीय पुलिस तथा आबकारी विभाग के चंद अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों को शराब पिलाई जाती है। हालांकि आबकारी विभाग ने विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान इस प्रकार के होटलों, रेस्टोरेंटों तथा बेंक्टस हॉल आदि में शराब पिलाने के लिए 1500 रूपये तथा घर आदि में इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए 500 रूपये की एक दिन की लाइसैंस फीस अस्थायी परमिट के लिए निर्धारित की हुई है जो परमिट कि आबकारी विभाग के धर्मपाल नामक एक अधिकारी के मुताबिक एक महीने में करीब 20 के आसपास ही जारी हो पाते है।

वास्तव में देखा जाए तो बिना बार लाइसैंस के चलने वाले होटल आदि शहर में दर्जनों की तादाद में है जिनमें की शाम होते ही शराब के जाम छलकने लगते है और उन पर किसी प्रकार का कोई अस्थायी परमिट भी नहीं होता है। ऐसे होटल मालिक संबंधित पुलिस तथा आबकारी विभाग के अधिकारियों की जेबें गर्म कर तथा उनकी सेवा-पानी कर अपने इस काम को बखूबी अन्जाम देते है। सरकार से बार लाइसैंस धारक होटल मालिकों ने मुख्यमंत्री तथा आबकारी व पुलिस के बड़े अधिकारियों से मांग की है कि वे इन अवैध बारों को चलाने वाले होटलों पर अंकुश लगाए ताकि सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी हो सके तथा बार लाइसैंस लेने वाले होटल मालिकों का बिजनेस भी प्रभावित न हो। अब देखना यह है कि सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है।




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